Rohit Pawar Hunger Strike In Pandharpur: महाराष्ट्र में किसानों के हक की लड़ाई ने फडणवीस सरकार को झुकने पर मजबुर कर दिया है। साेलापुर जिले के पंढरपुर में तीन दिन से अन्नत्याग आंदोलन कर रहे रोहित पवार ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। मंत्रियों के दखल और सरकार के सकारात्मक रुख के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि सरकार ने किसान कर्ममाफी योजना का नाम 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर' के नाम पर रखा था, लेकिन कई तरह की शर्तें और नियम लागू करने की वजह से ज्यादातर किसान इस योजना के फायदों से वंचित रह जाते। हमें लगा कि यह स्थिति खुद अहिल्यादेवी होल्कर का अपमान है। हमने पंढरपुर में भूख हड़ताल शुरू करके सरकार का ध्यान इस ओर खींचा। सरकार, जो शुरू में इन शर्तों को हटाने के लिए तैयार नहीं थी, अब उन्हें हटाने पर सहमत हो गई है। यह इस आंदोलन की सफलता है।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने पंढरपुर में आंदाेलन स्थल का पर जाकर रोहित पवार से मुलाकात की। रोहित ने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बातचीत की और हमें भरोसा दिलाया कि इन मुश्किल शर्तों को हटाने के बारे में सकारात्मक फैसला लेने के लिए मुंबई में आगामी मॉनसून सत्र से पहले एक बैठक होगी। इसके बाद रोहित पवार ने तीन दिनों से चल रही भूख हड़ताल को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया। महाराष्ट्र के वारकरियों के लिए बेहद श्रद्धा का केंद्र नामदेव पायरी पर महा-आरती के साथ इस उपवास को औपचारिक रूप से समाप्त किया गया। इस दौरान रोहित पवार के साथ अन्य भूख हड़ताली, वारकरी, किसान, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
रोहित पवार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि किसान कर्जमाफी के मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। मानसून सत्र से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ होने वाली बैठक में प्रतिनिधिमंडल में हर्षवर्धन सपकाल, राजू शेट्टी, शशिकांत शिंदे, कॉमरेड अजीत नवले, वामनराव चटप, महादेव जानकर, प्रवीणदादा गायकवाड़ और रविकांत तुपकर शामिल होंगे। रोहित पवार ने कहा कि यह आंदोलन अन्नदाताओं (किसान) के लिए था, इसलिए सरकार को एक मौका देना जरूरी था। अगर हम बिना किसी ठोस नतीजे के आंदोलन को लंबा खींचते, तो इससे न केवल मुझे व्यक्तिगत रूप से, बल्कि राज्य के किसानों को भी नुकसान होता। इसीलिए मैंने यह फैसला लिया।
अब जब सरकार भगवान विट्ठल की पवित्र भूमि पर आई है और उसने कर्जमाफी योजना की सख्त शर्तों को हटाने का वादा किया है, तो उम्मीद है कि वे अपनी बात निभाएंगे और राज्य के किसानों को न्याय दिलाएंगे। हालांकि, राेहित पवार ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए लिखा कि अगर मुख्यमंत्री के साथ बैठक का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला, तो हम सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
यह भी पढ़ें:- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की कुर्सी खतरे में! आलाकमान ने दिया 6 माह का अल्टीमेटम
रोहित पवार ने कहा कि मैं उन सभी लोगों का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने इस आंदोलन का समर्थन किया। राज्य भर के किसान, महा विकास अघाड़ी की सभी सहयोगी पार्टियां, विभिन्न संगठन और संघ, मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलने वाले नेता, फोन और सोशल मीडिया के जरिए समर्थन देने वाले लोग और निश्चित रूप से मेरा परिवार, जो मजबूती से मेरे साथ खड़ा रहा।