

Rohit Pawar Daughter: पंढरपुर की पावन धरती इस समय एक भावुक और संघर्षपूर्ण आंदोलन की गवाह बन रही है। किसानों की कर्जमाफी की मांग को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार द्वारा शुरू किए गए अन्नत्याग आंदोलन का आज तीसरा दिन है। जैसे-जैसे अनशन का समय बीत रहा है, रोहित पवार का शरीर साथ छोड़ता दिख रहा है, लेकिन उनका संकल्प अब भी हिमालय की तरह अडिग है। आज अनशन स्थल पर एक ऐसा हृदय विदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हजारों समर्थकों और किसानों की आंखों में आंसू ला दिए।
अनशन के तीसरे दिन रोहित पवार की शारीरिक स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है। सरकारी डॉक्टरों की एक टीम ने आज दोपहर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार भूखे रहने के कारण रोहित पवार का शुगर लेवल काफी नीचे गिर गया है और उनका ब्लड प्रेशर भी लो हो गया है। डॉक्टरों ने उनकी गिरती हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल सलाइन लगाने की सलाह दी ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे। हालांकि, किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए रोहित पवार ने डॉक्टरों की इस सलाह को सिरे से खारिज कर दिया और सलाइन लगवाने से साफ इनकार कर दिया।
जब रोहित पवार की बिगड़ती सेहत की खबर उनके परिवार तक पहुँची, तो उनकी पत्नी कुंती पवार, उनके बच्चे और उनकी मां खुद को रोक नहीं पाए और तुरंत अनशन स्थल पर मंच पर पहुँच गए। अपने पिता और पति को इस तरह कमजोर और अशक्त हालत में देखकर पूरा परिवार बेहद भावुक हो गया। सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब रोहित पवार की बेटी अपने पिता की गोद में सिर रखकर बिलख-बिलख कर रोने लगी। पिता की गिरती सेहत और उनके चेहरे पर छाई कमजोरी को देखकर बेटी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पत्नी कुंती और परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों में भी अपने अन्नदाता के हक के लिए लड़ रहे अपनों के प्रति चिंता और गर्व के मिश्रित भाव साफ देखे जा सकते थे।
रोहित पवार का यह आंदोलन महाराष्ट्र के उन लाखों किसानों के लिए है जो कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। इससे पहले भी इस मंच से कई नेताओं ने सरकार को घेरा है। हाल ही में शिवसेना नेता दत्ता मगर ने भी रोहित पवार के मंच पर आकर अपनी ही सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि किसानों की सुध नहीं ली गई, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
रोहित पवार के इस अन्नत्याग ने न केवल सरकार पर दबाव बनाया है, बल्कि यह एक बड़ा भावनात्मक आंदोलन भी बन गया है। समर्थकों का कहना है कि जो नेता अपने परिवार के आंसुओं के बावजूद किसानों के हक के लिए सलाइन तक लेने से मना कर दे, वह सच में जननायक है। फिलहाल, पंढरपुर में तनाव और भावनाएं चरम पर हैं और हर कोई बस यही प्रार्थना कर रहा है कि सरकार जल्द से जल्द किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय ले ताकि रोहित पवार का यह अनशन समाप्त हो सके।