Warkari VIP Treatment In Pandharpur: आषाढ़ी एकादशी को लेकर पावन नगरी पंढरपुर भक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर हो चुकी है। भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी के दर्शनों की अभिलाषा लिए महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया के कोने-कोने से लाखों वारकरी पंढरपुर पहुंच रहे हैं। विट्ठल-विट्ठल, विठू माऊली के जयघोष गूंज रहे हैं। श्रद्धालुओं की इस अपार भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति ने इस वर्ष सराहनीय कदम उठाए हैं।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि पंढरी की पावन भूमि पर आने वाला हर एक वारकरी हमारे लिए सबसे बड़ा मेहमान यानी VIP है। लंबी-लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने वाले श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से बचाने के लिए पूरे दर्शन मार्ग पर छाया की व्यवस्था की गई है।
इसके साथ ही पूरी कतार में बड़े-बड़े कूलर और पंखे लगाए गए हैं, ताकि भक्तों को उमस का सामना न करना पड़े। जगह-जगह विश्राम स्थल बनाए गए हैं, जहां थकान महसूस होने पर श्रद्धालु कुछ देर बैठकर आराम कर सकें। स्वच्छ पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की टीमें भी लगातार कतारों के आसपास तैनात हैं।
लंबी यात्रा करके आ रहे वारकरियों के स्वास्थ्य और पोषण का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मंदिर समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए सुबह के नाश्ते में शुद्ध देशी घी का हलवा और चावल-साबूदाने की खिचड़ी बांटी जा रही है। इसके साथ ही दोपहर और रात में सभी श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क और भरपेट भोजन (महाप्रसाद) की व्यापक व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी भक्त भूखा न रहे।
श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति के सह-अध्यक्ष गहिनिनाथ महाराज औसेकर ने कहा कि हमारे लिए कोई बड़ा नेता या अफसर VIP नहीं है, बल्कि आषाढ़ी यात्रा के दौरान पंढरपुर आने वाला हर वारकरी ही असली VIP है। भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए आए हर भक्त की देखभाल करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
पंढरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक समाधान आवताडे ने वारकरियों के सेवा के लिए 'चरण सेवा' पहल की शुरुआत की। उन्होंने कहा वारकरियों की सेहत काे ध्यान में रखते यह एक सेवा की एक छोटी सी कोशिश है। भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए पूरे राज्य से वारकारी पंढरपुर की यात्रा करते हैं।
इधर ‘वारकरी ही VIP है’ के इस विज़न ने पूरे पंढरपुर शहर में एक अद्भुत भक्तिमय और सेवाभावी माहौल पैदा कर दिया है। मंदिर समिति से लेकर स्थानीय नागरिक और स्वयंसेवी संस्थाएं भी वारकरियों की सेवा में दिन-रात जुटी हुई हैं। इस तरह के प्रबंधों के चलते घंटों कतार में खड़े रहने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
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प्रबंध समिति केवल कागजों या बैठकों तक सीमित नहीं है। श्री विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति के सह-अध्यक्ष गहिनिनाथ महाराज औसेकर खुद कतारों में जाकर श्रद्धालुओं से आत्मीयता से मुलाकात कर रहे हैं। वे भक्तों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं जान रहे हैं और तुरंत उनका समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन का यह संवेदनशील और आत्मीय रवैया देखकर दर्शन के लिए आए वारकरियों के चेहरे खिल उठे हैं।