नीतेश राणे व अबू आजमी (सोर्स: सोशल मीडिया) 
सिंधुदुर्ग

नीतेश राणे का अबू आजमी को चैलेंज, अज़ान भी मराठी में दें, मदरसों में पढ़ाएं मराठी, फिर हमें नसीहत दें

Marathi Controversy: अबू आजमी के बयान पर नीतेश राणे का तीखा पलटवार। राणे ने मदरसों में मराठी सिखाने और अज़ान को मराठी में देने की चुनौती दी। जानें महाराष्ट्र की इस नई भाषाई सियासत के बारे में।

गोरक्ष पोफली

Recite Azan In Marathi: समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी द्वारा मराठी स्कूलों और भाषा को लेकर दिए गए बयान पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक और कड़े तेवर वाले नेता नीतेश राणे ने पलटवार किया है। नीतेश राणे ने अबू आजमी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मराठी भाषा को लेकर नसीहत देने से पहले उन्हें अपने संस्थानों और संस्कृति में मराठी को जगह देनी चाहिए।

मदरसों में सिखाई जाए मराठी

नीतेश राणे ने अबू आजमी के बयान का जवाब देते हुए तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, हाँ, हम मराठी स्कूलों को जरूर मजबूत करेंगे, लेकिन उससे पहले आप सभी टोपी और दाढ़ी वालों को भी मराठी सीख लेनी चाहिए। मेरी अबू आजमी से गुजारिश है कि सबसे पहले राज्य के मदरसों में मराठी भाषा पढ़ाना अनिवार्य किया जाए। राणे ने अपनी बात को और आक्रामक रूप देते हुए यहाँ तक कह दिया कि, मदरसों में मराठी सिखाने के साथ-साथ, कल की अज़ान भी मराठी में ही देकर देखिए। जब आप अपनी धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं में मराठी को अपनाएंगे, तभी आपकी बातें तर्कसंगत लगेगी।

मराठी अस्मिता और राजनीतिक घमासान

महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर राज्य में भाषाई राजनीति चरम पर है। जहाँ एक ओर सरकार मराठी को हर स्तर पर अनिवार्य करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष और गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। नीतेश राणे का यह बयान उस समय आया है जब राज्य में अभिजात भाषा का दर्जा मिलने के बाद मराठी को लेकर गौरव और इसके क्रियान्वयन पर बहस छिड़ी हुई है।

पहले भी हुआ है विवाद

इससे पहले भी आजमी मराठी भाषा को लेकर विवाद में रह चुके है, अबू आजमी ने अपने पुराने संबोधन में कहा था कि यह भिवंडी है, यहाँ मराठी की क्या जरूरत? उनके इस बयान ने न केवल राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है, बल्कि उनके उन पुराने विवादों की यादें भी ताजा कर दी हैं, जब उन्होंने सदन के भीतर मराठी का विरोध किया था। उस बयान पर मनसे और भाजपा के आक्रामक रुख को देखते हुए आजमी ने बाद में नरमी बरतते हुए स्पष्टीकरण भी दिया था।

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