Satara Shivsena Conflict: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सतारा दौरे के दौरान कोरेगांव विधायक महेश शिंदे की अनुपस्थिति ने सबको चौंका दिया। इस पर सफाई देते हुए महेश शिंदे ने सीधे तौर पर पालकमंत्री शंभूराज देसाई पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम के लिए कोई निमंत्रण नहीं दिया गया और न ही कोई फोन आया। शिंदे ने कहा, "जब से साहब (एकनाथ शिंदे) उपमुख्यमंत्री बने हैं, कार्यक्रमों के बैनरों से मेरा फोटो गायब रहता है। यह पहली बार नहीं है जब मुझे जानबूझकर दरकिनार किया गया हो।"
महेश शिंदे ने जिले में पार्टी के संगठन की स्थिति पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर जिले में शिवसैनिक बचे कहाँ हैं? उन्होंने शंभूराज देसाई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से पालकमंत्री पद पर रहने के बावजूद पार्टी जिले में 30 सदस्यों तक भी नहीं पहुँच पाई है। यह बयान सीधे तौर पर देसाई की संगठनात्मक विफलता की ओर इशारा करता है।
अपनी पत्नी के जिला परिषद चुनाव को लेकर चल रही चर्चाओं पर महेश शिंदे ने स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी शिवसेना से ही चुनी गई थीं और बीजेपी की मदद से अध्यक्ष नहीं बनीं। उन्होंने साफ कहा कि वे शुरुआत से ही बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जो एक तरह से गठबंधन धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है, लेकिन जिले के भीतर स्थानीय नेतृत्व के साथ उनके संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं।
महेश शिंदे और शंभूराज देसाई के बीच का यह विवाद अब पक्ष प्रमुख एकनाथ शिंदे के लिए सिरदर्द बन सकता है। एक तरफ शंभूराज देसाई कैबिनेट मंत्री और भरोसेमंद सहयोगी हैं, तो दूसरी तरफ महेश शिंदे कोरेगांव में पार्टी का मजबूत चेहरा हैं। अगर यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले चुनावों में सतारा में शिवसेना को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कौन है महेश शिंदे?
सतारा के कोरेगांव से शिवसेना विधायक महेश शिंदे अपनी ही पार्टी के मंत्री शंभूराज देसाई के खिलाफ मोर्चा खोलने के कारण चर्चा में हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले महेश शिंदे बाद में भाजपा और फिर शिवसेना में शामिल हुए।
उनका राजनीतिक दबदबा तब दिखा जब उन्होंने अपनी पत्नी प्रिया शिंदे को भाजपा से जिला परिषद चुनाव जिताया और संख्याबल न होने के बावजूद भाजपा का अध्यक्ष बनवा दिया। इसी दौरान हुई एक झड़प के कारण शंभूराज देसाई और उनके बीच ठन गई, जो अब खुलकर सामने आ गई है। शिंदे का आरोप है कि जिले में उन्हें जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है।