कर्जत पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट भारत के ऊर्जा लक्ष्यों और ग्रिड स्थिरता का मील का पत्थर है।
संवेदनशील सह्याद्री क्षेत्र में वनों की भारी कटाई और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
पारदर्शी संवाद, ग्राम पंचायतों की सहमति और कड़े वृक्षारोपण की निगरानी से ही विवाद सुलझ सकता है।
Karjat Pump Storage Controversy Torrent Power Maharashtra: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में सह्याद्री की पहाड़ियों के बीच स्थित कर्जत तहसील में प्रस्तावित 3,000 MW के सैडोंगर-1 कर्जत पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट को लेकर राज्य में बड़ा राजनीतिक और पर्यावरणीय विवाद छिड़ गया है।
एक तरफ जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और टॉरेंट पावर इसे महाराष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए बेहद जरूरी और पर्यावरण-अनुकूल बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने 32,000 से अधिक पेड़ों की कटाई और सह्याद्री के इकोसिस्टम के विनाश का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
कर्जत पंप स्टोरेज परियोजना का निर्माण टॉरेंट पावर द्वारा किया जा रहा है। ₹13,505.15 करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट भारत के सबसे बड़े पंप स्टोरेज प्लांट में से एक होगा। टॉरेंट पावर ने महाराष्ट्र में कुल 5.7 GW क्षमता की तीन पंप स्टोरेज परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार के साथ समझौता किया है, जिसमें कुल ₹27,000 से ₹30,000 करोड़ का निवेश शामिल है।
पंप स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाएं एक विशाल वाॅटर बैटरी की तरह काम करती हैं।
नॉन-पीक आवर्स: जब सौर या पवन ऊर्जा का उत्पादन अधिक और बिजली की मांग कम होती है, तब अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके निचले जलाशय से पानी को ऊपरी जलाशय में पंप किया जाता है।
पीक आवर्स: जब शाम को या मांग बढ़ने पर बिजली की आवश्यकता होती है, तो ऊपरी जलाशय से पानी को नीचे छोड़कर रिवर्सिबल टर्बाइनों के माध्यम से तुरंत स्वच्छ जलविद्युत उत्पन्न की जाती है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और टॉरेंट पावर के अनुसार, यह परियोजना थर्मल आधारित बिजली पर निर्भरता घटाने के लिए पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल है। इसके कई प्रमुख पर्यावरणीय लाभ मिलते हैं।
स्वच्छ बिजली उत्पादन: यह संयंत्र प्रतिवर्ष औसतन 6,241.5 मिलियन यूनिट (GWh) स्वच्छ बिजली का उत्पादन करेगा।
कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी: कोयला आधारित बिजली उत्पादन की तुलना में इससे प्रतिवर्ष लगभग 4.55 से 5.85 मिलियन टन CO2 का उत्सर्जन टलेगा। यह वार्षिक रूप से लगभग 10 लाख कारों को सड़क से हटाने के बराबर है।
कोयले और पानी की बचत: परियोजना से प्रतिवर्ष 4.33 से 4.6 मिलियन टन कोयले की खपत बचेगी और 19.7 अरब लीटर कूलिंग वाटर की बचत होगी। यह पानी लगभग 4 लाख लोगों की वार्षिक जरूरतों को पूरा कर सकता है।
ओपन-लूप पुनर्चक्रण: परियोजना में दो जलाशयों के बीच 14.77 MCM जल का नॉन- कंस्म्पटिव री-सर्क्यूलेशन किया जाएगा, जिससे बार-बार नए पानी की आवश्यकता नहीं होगी।
यह तुलनात्मक चार्ट दर्शाता है कि 3,000 मेगावॉट क्षमता की समान तापीय बिजली (कोयला आधारित) की तुलना में कर्जत पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट शून्य कोयला खपत, शून्य CO2 उत्सर्जन और शून्य कूलिंग वाटर खपत के साथ वार्षिक 45.5 लाख टन CO2 और 1,970 करोड़ लीटर पानी बचाता है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने परियोजना के स्थल चयन और वनों की कटाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
32,490 से अधिक पेड़ों की कटाई: इस परियोजना के लिए कुल 377 हेक्टर भूमि की आवश्यकता है। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 233 हेक्टर वन भूमि के डायवर्जन और 32,490 पेड़ों को काटने की अनुमति जारी की गई है। विपक्ष का आरोप है कि वास्तविक रूप से काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या लाखों तक पहुंच सकती है।
जैव विविधता और वन्यजीवों पर प्रभाव: यह क्षेत्र महाराष्ट्र के राज्य प्राणी शेकरू, तेंदुए, हिरण, दुर्लभ पक्षियों, सरीसृपों और मूल्यवान औषधीय वनस्पतियों का प्राकृतिक आवास है। जंगल की कटाई से इनके बेघर होने और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका है।
भूस्खलन का खतरा: पहाड़ियों में सुरंग बनाने और भारी विस्फोटों के कारण पहाड़ों के कमजोर होने और मालीन या इर्शलवाड़ी जैसी प्राकृतिक लैंडस्लाईड का जोखिम व्यक्त किया गया है।
विरोध प्रदर्शनों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा- यह परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से 15.53 से 16 किमी दूर और भीमाशंकर मंदिर से 20 किमी दूर है, जो इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) के बाहर है।
233 हेक्टर वन भूमि के बदले टॉरेंट कंपनी ने वन विभाग को 253 हेक्टर भूमि सौंपी है। कंपनी के खर्चे से वन विभाग द्वारा 30,000 पेड़ और टॉरेंट पावर द्वारा साइट पर 60,000 पेड़ मतलब कुल 90,000 पेड़ लगाए जाएंगे। इसके अलावा मड डंपिंग साइट्स के आसपास 10,000 पौधे अलग से लगाए जाएंगे।
परियोजना को 18 महीने की विस्तृत वैधानिक जांच, जनसुनावणी और पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति के बाद ही मंजूरी मिली है। इससे 2,000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा और बनने वाली पूरी बिजली महाराष्ट्र को प्राप्त होगी।
यह चार्ट दिखाता है कि कर्जत परियोजना हेतु स्वीकृत 32,490 पेड़ों की कटाई के बदले वन विभाग और टॉरेंट पावर मिलकर लगभग 90,000 नए पेड़ (3 गुना अधिक) लगाने जा रहे हैं।
कर्जत पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट भारत के 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य (2030) और ग्रिड स्थिरता की दिशा में एक तकनीकी मील का पत्थर है। हालांकि, सह्याद्री जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच पारदर्शी संवाद, ग्राम पंचायतों की सहमति और क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की कड़ाई से निगरानी ही इस विवाद का सर्वमान्य समाधान बन सकती है।