

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम का उपयोग होता है।
विजयी होने के लिए उम्मीदवारों को तयशुदा विनिंग कोटा हासिल करना अनिवार्य होता है।
कम वोट पाने वाले प्रत्याशियों के मतों का हस्तांतरण समीकरण बदल देता है।
Preference Voting In Maharashtra MLC Election: भारत की जीवंत लोकतांत्रिक प्रणाली में महाराष्ट्र विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव अपने अंतिम व सबसे रोमांचक चरण में पहुंच गए हैं। राज्य के 5 प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में बीते शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से दोपहर 4 बजे तक मतदान प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई, और अब मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मतगणना होने जा रही है। इन 5 सीटों पर कुल 182 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
यह चुनाव आम चुनावों से पूरी तरह अलग होता है क्योंकि इसमें सिंगल ट्रांस्फरेबल वोट सिस्टम और प्रेफरेंस वोटिंग का उपयोग किया जाता है। आइए समझें कि इस चुनाव की मतगणना कैसे होती है और वोटों का हस्तांतरण किस प्रकार किसी उम्मीदवार की हार को जीत में बदल सकता है।
3 स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: औरंगाबाद विभाग, पुणे विभाग और नागपुर विभाग।
2 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: अमरावती विभाग और पुणे विभाग।
कुल मैदान में उम्मीदवार: 182 प्रत्याशी।
मतगणना की तिथि: मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
इस प्रणाली में सिर्फ सबसे ज्यादा वोट पाना ही जीत की गारंटी नहीं होती, बल्कि उम्मीदवार को विनिंग कोटा हासिल करना अनिवार्य होता है।
महाराष्ट्र विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की इस चुनाव प्रणाली में केवल सबसे ज्यादा वोट पाना ही जीत की गारंटी नहीं होता, बल्कि उम्मीदवार के लिए निर्धारित विजेता कोटा हासिल करना अनिवार्य होता है। यह कोटा निर्वाचन क्षेत्र में पड़े कुल वैध वोटों के आधार पर तय किया जाता है।
इसके लिए कुल वैध वोटों को 2 से विभाजित करके उसमें 1 जोड़ा जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10,000 वैध वोट पड़े हैं, तो जीतने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 5,001 वोट हासिल करने होंगे। यानी इस प्रणाली के तहत उम्मीदवार को विजयी घोषित होने के लिए निर्धारित कोटा प्राप्त करना जरूरी है।
मान लीजिए कि 10,000 वैध वोटों के चुनाव मैदान में 4 उम्मीदवार खड़े हैं, अ, ब, क और ड।
चरण 1: फर्स्ट प्रेफरेंस के वोटों की गिनती
उम्मीदवार अ: 4,000 वोट
उम्मीदवार ब: 3,000 वोट
उम्मीदवार क: 2,000 वोट
उम्मीदवार ड: 1,000 वोट
सबसे अधिक 4,000 वोट पाकर भी उम्मीदवार अ 5,001 के विजयी कोटे तक नहीं पहुंच सके, इसलिए पहले चरण में कोई विजेता घोषित नहीं होता।
चरण 2: सबसे कम वोट वाले प्रत्याशी का निष्कासन और वोटों का ट्रांसफर
सबसे कम वोट (1,000 वोट) पाने वाले उम्मीदवार 'ड' को रेस से बाहर कर दिया जाता है। अब उम्मीदवार ड की 1,000 मतपत्रिकाओं की जांच की जाती है कि उन मतदाताओं ने सेकंड प्रेफरेंस किसे दी है?
600 मतदाताओं ने दूसरी पसंद 'अ' को दी।
300 मतदाताओं ने दूसरी पसंद 'ब' को दी।
100 मतपत्रिकाओं पर अगली कोई वैध पसंद नहीं थी।
नया स्कोर:
अ: 4,000 + 600 = 4,600 वोट
ब:3,000 + 300 = 3,300 वोट
क: 2,000 वोट
अभी भी अ (4,600 वोट) कोटे (5,001) से दूर हैं, इसलिए गिनती तीसरे चरण में जाती है।
चरण 3: क का निष्कासन और अंतिम परिणाम
अब बचे हुए प्रत्याशियों में सबसे कम वोट (2,000 वोट) वाले उम्मीदवार 'क' को निष्कासित किया जाता है। उम्मीदवार क के 2,000 वोटों की अगली पसंद जांची जाती है। 1,200 वोटों में अगली पसंद अ को मिली। 500 वोटों में अगली पसंद ब को मिली। 300 वोट गैर-हस्तांतरणीय रहे।
अंतिम स्कोर
उम्मीदवार अ: (4,600 + 1,200 = 5,800 वोट)
उम्मीदवार ब: (3,300 + 500 = 3,800 वोट)
अंतिम परिणाम- उम्मीदवार अ ने आवश्यक 5,001 वोटों का कोटा पार कर लिया और उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया।
अब मतगणना शुरू होने में चंद घंटे ही शेष हैं। मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुबह से पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में वोटों की गिनती शुरू होगी और इसके साथ ही उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला भी सामने आने लगेगा। इन चुनावों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि महाराष्ट्र की राजनीति में किसका पलड़ा भारी रहता है सत्तारूढ़ महायुति या विपक्षी महाविकास आघाड़ी?
पसंद क्रम और वोटों के हस्तांतरण की जटिल प्रक्रिया के बीच कौन बाजी मारता है और किस गठबंधन को बढ़त मिलती है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।