पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

एक करोड़ के बजट को छोटे कामों में बांटने का प्रस्ताव, पुणे मनपा की निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल

Development Work Tender Splitting PMC: पुणे मनपा में 25 लाख रुपये तक के कामों की निविदा प्रक्रिया प्रभाग समितियों को मिलने के बाद बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटने पर सवाल उठे हैं।

वेदांत जोशी

Pune PMC Allows Tenders Up To Rs 25 Lakh Through Ward Committees: कोरोना काल के बाद आर्थिक दबाव को देखते हुए पुणे महानगरपालिका प्रशासन ने खर्चों पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया था। हालांकि, निर्वाचित सभागृह के गठन के बाद कुछ वित्तीय प्रतिबंधों में ढील दिए जाने से बड़े विकास कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर निविदा निकालने की गुंजाइश पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थायी समिति के निर्णय के बाद 25 लाख रुपये तक के कामों की निविदा प्रक्रिया का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालयों की प्रभाग समितियों को दिया गया है। इसके बाद एक करोड़ रुपये जैसी बड़ी बजटीय राशि को 20 से 25 लाख रुपये के अलग-अलग कार्यों में विभाजित करने की स्थिति सामने आ रही है।

खांदवेनगर में एक करोड़ के काम का वर्गीकरण प्रस्तावित

प्रभाग क्रमांक 3 विमाननगर-लोहगांव के खांदवेनगर में 30 हजार लीटर क्षमता की पेयजल टंकी के लिए बजट में एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इसी राशि के तहत अलग-अलग कामों का वर्गीकरण करने का प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष रखा गया है।

इसी तरह बर्माशेल स्थित इंदिरानगर की लेन नंबर 1 और 2 में बारिश के पानी की निकासी के लिए 20 लाख रुपये तथा लेन नंबर 3 और 4 के लिए भी 20 लाख रुपये के काम प्रस्तावित हैं। वहीं, खांदवेनगर में महालक्ष्मी लॉन्स के सामने मुख्य सड़क से खांदवेनगर तक ड्रेनेज लाइन का काम तीन हिस्सों में बांटकर 20-20 लाख रुपये, यानी कुल 60 लाख रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

एक ही निविदा से हो सकती थी संयुक्त निगरानी

आपस में जुड़े इन कार्यों का संयुक्त अनुमान तैयार कर एक ही निविदा निकाली जा सकती थी। इससे स्थायी समिति के स्तर पर प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा और निगरानी की गुंजाइश बनी रहती। लेकिन 25 लाख रुपये तक के कार्यों के अधिकार प्रभाग समितियों को मिलने के बाद ऐसे कामों की निविदाएं क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर निकालने और संबंधित प्रभाग समिति से मंजूरी लेने का रास्ता खुल गया है।

कामों को 25 लाख रुपये की सीमा के भीतर विभाजित किए जाने पर संबंधित निविदाएं दक्षता विभाग की जांच के दायरे से बाहर रहने की आशंका जताई जा रही है। इससे वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी और निविदा प्रक्रिया पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

तकनीकी औचित्य और स्वतंत्रता की जांच जरूरी

वित्तीय अनुशासन के लिए बनाई गई व्यवस्था में इस तरह की छूट से भविष्य में बड़े बजटीय कार्यों को छोटे हिस्सों में बांटकर मंजूरी लेने की प्रवृत्ति बढ़ने की आशंका है। ऐसे में प्रत्येक कार्य के स्वतंत्र होने, निविदा विभाजन की आवश्यकता और उसके तकनीकी औचित्य की जांच महत्वपूर्ण होगी।

प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि प्रस्तावित कार्य वास्तव में अलग-अलग और स्वतंत्र हैं या उन्हें केवल 25 लाख रुपये की सीमा के भीतर लाने के लिए विभाजित किया गया है। इससे निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और वरिष्ठ स्तर की निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत और बढ़ गई है।

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