“मांडवगण फराटा बांध (सोर्सः सोशल मीडिया) 
पुणे

“मांडवगण फराटा बांध में बड़े पैमाने पर जल रिसाव, किसानों में आक्रोश; प्रशासन को तुरंत मरम्मत के निर्देश”

Water Leakage Issue: मांडवगण फराटा में भीमा नदी पर स्थित बांध से भारी जल रिसाव। नए गेट लगाने के दावे फेल, पुराने गेटों के कारण लाखों लीटर पानी बर्बाद। किसानों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।

रूपम सिंह

Irrigation Crisis Maharashtra: पुणे शिरूर तहसील के मांडवगण फराटा में भीमा नदी पर स्थित कोल्हापुरी पद्धति के बांध से बड़े पैमाने पर जल रिसाव होने के कारण क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश है। जल संसाधन विभाग ने दावा किया था कि इस बांध पर 1,050 नए लोहे के गेट लगाए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पुराने, जंग लगे और जर्जर गेट को हटाए नहीं जाने से लाखों लीटर पानी बहकर सीधे नदी में बर्बाद हो रहा है, जिससे भविष्य में गंभीर जल संकट की आशंका पैदा हो गई है।

शिरूर और दौंड तहसील के दर्जनों गांवों की कृषि के लिए यह कोल्हापुरी शैली बांध 'जीवनरेखा' माना जाता है। करीब तीन महीने पहले प्रशासन ने यहां नए गेट लगाने का काम शुरू किया था। स्थानीय किसानों का आरोप है कि आवश्यक संख्या में नए गेट उपलब्ध न होने के कारण कई जगहों पर पुराने और सड़े हुए गेट ही छोड़ दिए गए। गंभीर बात यह है कि कुछ स्थानों पर पुराने गेट को पूरी तरह हटाए बिना ही उनके ऊपर नए गेट लगा दिए गए, जिसकी वजह से उनके जोड़ों से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है।

गर्मी से पहले गहराया संकट

वर्तमान में जबकि गर्मी का मौसम दस्तक दे रहा है, संचित पानी का एक-एक बूंद कृषि और पीने के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन तकनीकी खामियों और 'खानापूर्ति' वाले काम के कारण बांध का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। यदि यह रिसाव तुरंत नहीं रोका गया, तो सिंचाई के लिए पानी कम पड़ जाएगा, जिसका सीधा असर फसलों की पैदावार पर पड़ेगा, किसान गणेश फराटे, वैभव फराटे और सतीश फराटे ने मांग की है कि बांध की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए और सभी पुराने ढापों को बदलकर जोड़ों को मजबूती से सील किया जाए।

भविष्य में सूखे की संभावना

किसान राजेंद्र दरेकर ने बताया की शिरूर तहसील के मांडवगण फराटा बांध में नए गेट लगाने के बाद भी पानी का रिसाव जारी है। सिंचाई विभाग ने अगर इसे तुरंत नहीं रोका, तो भविष्य में यहां गंभीर सूखा पड़ सकता है। प्रशासन को अपनी लापरवाही सुधारनी चाहिए।

पानी की रूकेगी बर्बादी

पुणे जल -संसाधन विभाग अधीक्षक पृथ्वीराज फालके ने बताया की मांडवगण फराटा-कानगाव बांध से हो रहे जल रिसाव की जानकारी मिली है। हमने संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर निरीक्षण करने और मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे।

समस्या प्रभाव
जर्जर पुराने गेट नए गेटों के साथ पुराने सड़े हुए गेट छोड़ दिए गए, जिससे जोड़ (joints) पूरी तरह सील नहीं हुए।
तकनीकी खामी पुराने गेटों को हटाए बिना उनके ऊपर ही नए गेट लगा दिए गए, जिससे रिसाव बढ़ गया है।
जल संकट गर्मी शुरू होने से पहले ही बांध का जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे सिंचाई प्रभावित होगी।

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