Eknath Shinde statement
(सोर्सः सोशल मीडिया)
Pune PCMC Shiv Sena Executive Revamp: महाराष्ट्र की राजनीति में सांगठनिक मजबूती को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका चुनावों में शिवसेना (शिंदे गुट) के निराशाजनक प्रदर्शन और पार्टी के भीतर गहराते आंतरिक कलह को देखते हुए दोनों शहरों की पूरी कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
पार्टी नेतृत्व के इस अचानक लिए गए फैसले को एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। उद्योग मंत्री और पुणे जिले के संपर्क नेता उदय सामंत ने आधिकारिक तौर पर इस निर्णय की पुष्टि की है।
Pune मनपा में नहीं खुला खाता
इस कार्रवाई के तहत वर्तमान के सभी पदाधिकारियों को फिलहाल 'प्रभारी' घोषित कर दिया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पुणे मनपा में खाता न खुल पाना और पिंपरी-चिंचवड़ में महज छह सीटों पर सिमट जाना मुख्यमंत्री की नाराजगी का मुख्य कारण बना।
पार्टी में नेताओं के बीच लंबे समय से शीतयुद्ध
- पार्टी के भीतर पुराने शिवसैनिकों और अन्य दलों से आए नए नेताओं के बीच लंबे समय से शीतयुद्ध चल रहा था, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। पुणे में रवींद्र धंगेकर और नाना भानगिरे जैसे प्रमुख चेहरों के बीच सांगठनिक संतुलन बिठाना नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
- पिपरी-चिंचवड़ में सांसद श्रीरंग बारणे के नेतृत्व में भी चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
- अब एक महीने के भीतर नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस दौरान निष्क्रय और गुटबाजी में लिप्त पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाना तय माना जा रहा है, जबकि जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को नई और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
- हालांकि, इस पुनर्गठन के बीच पार्टी में गुटबाजी और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हर धड़ा नई कार्यकारिणी में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए जोर-आजमाइश कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई नियुक्तियों में संतुलन नहीं बनाया गया, तो विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को बड़ी बगावत का सामना करना पड़ सकता है।