ससून जनरल अस्पताल (फाइल फोटो) 
पुणे

Pune के ससून अस्पताल ने रचा इतिहास, TNDM से जुड़ा नया म्यूटेशन प्रमाणित

Pune Hindi News: पुणे के ससून अस्पताल ने ट्रांजियंट नियोनेटल डायबिटीज मेलिटस से जुड़े एक नए आनुवंशिक म्यूटेशन की विश्व की पहली वैज्ञानिक पुष्टि कर वैश्विक चिकित्सा जगत में पहचान बनाई है।

अपूर्वा नायक

Pune Sassoon Hospital News : बी जे शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं ससून सर्वोपचार अस्पताल, पुणे के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

यहां के डॉक्टरों ने ट्रांजियंट नियोनेटल डायबिटीज मेलिटस (TNDM) से जुड़े एक नए आनुवंशिक म्यूटेशन का दुनिया में पहली बार वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित संबंध खोजा है। इस महत्वपूर्ण खोज से पुणे ने वैश्विक चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

यह शोध 27 सप्ताह में जन्मे केवल 720 ग्राम वजन वाले एक अत्यंत प्रीमेच्योर नवजात पर आधारित है। जन्म के तुरंत बाद बच्चे में लगातार अत्यधिक रक्त शर्करा (हाइपरग्लाइसीमिया) पाई गई, जांच में नियोनेटल डायबिटीज मेलिटस का निदान हुआ। प्रारंभ में बच्चे को इंसुलिन उपचार की आवश्यकता पड़ी, लेकिन कुछ समय बाद मधुमेह अपने आप ठीक हो गया। बाद इसकी TNDM के रूप में पुष्टि की गई।

यह खोज ससून अस्पताल और बी। जे। मेडिकल कॉलेज के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। हमारी नियोनेटोलॉजी और क्लिनिकल जेनेटिक्स टीम ने जिस वैज्ञानिक समर्पण और तकनीकी दक्षता के साथ यह उपलब्धि हासिल की है, वह प्रशंसनीय है।

यह सोच न केवल नवजात शिशुओं के बेहतर और सटीक उपचार का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि सरकारी चिकित्सा संस्थान वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण और नवाचारी अनुसंधान कर सकते हैं। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। - डॉ। एकनाथ पवार, डीन, बी। जे। मेडिकल कॉलेज एवं ससून सर्वोपचार अस्पताल

सरकारी चिकित्सा संस्थानों से भी विश्व स्तरीय अनुसंधान संभव

बच्चे पर किए गए उन्नत आनुवंशिक परीक्षण में 'MS4A6A जीन' में एक ऐसा होमोजाइगस म्यूटेशन पाया गया, जिसे पहले कभी नियोनेटल डायबिटीज से नहीं जोड़ा गया था। विस्तृत जेनेटिक विश्लेषण से यह प्रमाणित हुआ कि यही नया म्यूटेशन इस दुर्लभ रोग के पीछे का प्रमुख कारण है।

इस उपलब्धि पर ससून अस्पताल के डीन डॉ। एकनाथ पवार ने बाल रोग विभाग की प्रमुख डॉ। आरती किनीकर, सहयोगी प्राध्यापक डॉ। प्रगति कामत तथा नियोनेटोलॉजी टीम के डॉ। संदीप कदम और डॉ। सोहराब शकील की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह शोध इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि सरकारी चिकित्सा संस्थानों से भी विश्व स्तरीय अनुसंधान संभव है।

अधिक सटीक व किफायती हो सकेगा उपचार

यह शोध एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इससे भविष्य में ऐसे शिशुओं को अनावश्यक जीवन भर इंसुलिन लेने से बचाया जा सकेगा और उपचार अधिक सटीक व किफायती हो सकेगा।

साथ ही, ससून अस्पताल का NICU और क्लिनिकल जेनेटिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नवजात अनुसंधान में अग्रणी केंद्र के रूप में और अधिक सुदृढ़ हुआ है। यह खोज नवजात मधुमेह के निदान और उपचार में एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

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