मुरलीधर मोहोल से चर्चा करते संजय राउत (सोर्स: सोशल मीडिया)  
पुणे

संजय राउत पहुंचे मुरलीधर मोहोल के द्वार, सियासत के दुश्मन जब घर आकर मिले, तो क्या हैं इसके मायने?

Mohol Ligament Surgery: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने पुणे में केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल से मुलाकात की। मोहोल की सर्जरी के बाद हुई इस भेंट ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है।

गोरक्ष पोफली

Sanjay Raut Meets Murlidhar Mohol: महाराष्ट्र की राजनीति अपनी अनिश्चितताओं और चौंकाने वाले मोड़ों के लिए जानी जाती है। हाल ही में शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने पुणे के कोथरुड स्थित केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। यह मुलाकात मोहोल के स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए थी, लेकिन महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए इसके कई सियासी मतलब निकाले जा रहे हैं।

मुरलीधर मोहोल को क्या हुआ?

पुणे के सांसद मुरलीधर मोहोल हाल ही में एक सर्जरी से गुजरे हैं। सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वह पिछले 29 वर्षों से लिगामेंट की चोट से जूझ रहे थे। यह चोट उन्हें कोल्हापुर में कुश्ती के दौरान लगी थी, जिसके कारण उन्हें अपना कुश्ती का करियर भी छोड़ना पड़ा था। मोहोल ने बताया, वर्षों तक मैंने इस दर्द को नजरअंदाज किया, लेकिन अब यह असहनीय हो गया था। डॉक्टरों की सलाह पर संसद सत्र के दौरान ही ऑपरेशन कराना पड़ा। अब मुझे कम से कम एक महीने के आराम की सलाह दी गई है।

क्या है शिवसेना (UBT) की रणनीति?

संजय राउत की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की कथित गुप्त मुलाकातों को लेकर अफवाहें चरम पर हैं। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर सब कुछ ठीक है? या फिर शिवसेना (UBT) भविष्य के लिए अपने रास्ते खुले रख रही है? संजय राउत, जो आमतौर पर बीजेपी पर तीखे प्रहारों के लिए जाने जाते हैं, उनका एक केंद्रीय मंत्री के घर जाकर सद्भावना भेंट देना 'सॉफ्ट डिप्लोमेसी' का हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव नजदीक आते देख राजनीतिक दल व्यक्तिगत संबंधों के जरिए संवाद की खिड़की खुली रखना चाहते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर नए समीकरण बनाए जा सकें।

शिष्टाचार या सियासी संकेत?

राउत ने मोहोल के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और उनके साथ समय बिताया। हालांकि, इसे पूरी तरह 'अराजनैतिक' बताया जा रहा है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ भी अराजनैतिक नहीं होता। विपक्षी नेता का सत्तापक्ष के मंत्री से मिलना कार्यकर्ताओं के बीच भी कौतूहल पैदा कर रहा है। क्या यह शिवसेना (UBT) की ओर से बीजेपी के प्रति कम होती कड़वाहट का संकेत है, या सिर्फ एक व्यक्तिगत मैत्री का प्रदर्शन? यह तो वक्त ही बताएगा।

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