Rohit Pawar Questions Maharashtra Police: महाराष्ट्र की राजनीति में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और राज्य सरकार के राजनीतिक दबाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
शरदचंद्र पवार गुट के नेता रोहित पवार ने राज्य सरकार और पुलिस महकमे पर कड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और मुख्यमंत्रियों के इशारे पर चलने वाली संस्था बन गई है।
रोहित पवार ने पुलिस द्वारा चुनिंदा मामलों में त्वरित कार्रवाई करने और अन्य गंभीर शिकायतों की अनदेखी किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से कहा कि विधायक श्वेता महाले पर अश्लील टिप्पणी करने के मामले में विधायक संजय गायकवाड के खिलाफ पुलिस ने बिना किसी देरी के तुरंत मामला दर्ज कर लिया।
इसी प्रकार, संतोष पंडित प्रकरण में भी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए रात के 1 बजे मामला दर्ज किया और महज एक घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इसके विपरीत, कोथरूड पुलिस स्टेशन में आरती रेडेकरआंबी और सोनाली कांबले द्वारा दी गई गंभीर शिकायत पर 5 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया है।
मामले का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि कोथरूड पुलिस स्टेशन में आरती रेडेकरआंबी और सोनाली कांबले ने छेड़छाड़ का गंभीर मामला दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत सौंपी थी। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस स्टेशन में चार घंटे तक धरना भी दिया, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की।
रोहित पवार ने सवाल उठाया कि जब संविधान के समक्ष देश का हर नागरिक समान है, तो श्वेता महाले से जुड़ी शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज होती है और संतोष पंडित पर रातोंरात कार्रवाई हो जाती है, लेकिन सोनाली कांबले और आरती रेडेकरआंबी की गंभीर अपराध की शिकायत पर 5 दिनों तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
रोहित पवार ने पुलिस अधिकारियों के बारे में कहा कि अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अच्छे हैं, लेकिन राजनीतिक आकाओं के दबाव में उनसे संविधान विरोधी और पक्षपातपूर्ण काम कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बुलढाणा केस, संतोष पंडित प्रकरण और सोनाली कांबले की शिकायत इन तीनों मामलों ने पुलिस विभाग के राजनीतिक अव्यवस्था और असंवैधानिक कामकाज की पोल खोल दी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की जनता में अब यह भावना प्रबल हो चुकी है कि पुलिस प्रशासन मुख्यमंत्रियों के राजनीतिक आदेशों का पालन करने वाली कठपुतली बनकर रह गया है। चुनिंदा मामलों में राजनीतिक दबाव के तहत एफआईआर दर्ज करना और विरोधियों व आम जनता की सच्ची शिकायतों को दबाना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन की इस भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक कार्रवाई का यह मुद्दा अब उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब इस मामले में पुलिस विभाग के असंवैधानिक रवैये और कामकाज की जांच होगी, तब न केवल संबंधित पुलिस अधिकारी कानूनी शिकंजे में फंसेंगे, बल्कि उन्हें राजनीतिक आदेश देने वाले आका भी कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे।