

Land-Related Fraud: पुणे के भोर तालुका के कासुर्डी में 93 गुंठे जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, बिल्डर प्रवीण प्रतापराव जगताप और उनकी मां सिंधु जगताप के संयुक्त स्वामित्व वाली जमीन को लेकर करीब 8 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ था। इस सौदे के तहत जगताप को कुल 2.35 करोड़ रुपये मिले, लेकिन बाद में विवाद के बाद सौदा रद्द कर पूरी रकम वापस कर दी गई। आरोप है कि इसके बावजूद इसी जमीन पर किसी तीसरे व्यक्ति के अधिकार का दावा सामने आया।
शिकायत के मुताबिक, मार्च 2023 में जगताप की विक्रम विलास चाकणकर से धायरी के एक होटल में मुलाकात हुई थी। यहां कासुर्डी स्थित गट नंबर 350 की जमीन का सौदा करीब 8 करोड़ रुपये में तय होने का दावा है। चाकणकर ने शुरुआत में नकद और चेक के माध्यम से 1.85 करोड़ रुपये दिए। इसके बाद जगताप को बेटी की शादी के लिए अतिरिक्त पैसों की जरूरत होने की बात सामने आई और चाकणकर के मित्र सचिन मधुकर सुरवे के जरिए 50 लाख रुपये और दिए गए। इस तरह कुल 2.35 करोड़ रुपये जगताप को प्राप्त हुए।
शिकायत के अनुसार, बाद में चाकणकर और सुरवे के बीच विवाद पैदा हो गया। इसके बाद संबंधित पक्षों ने जमीन का सौदा रद्द करने का निर्णय लिया। 26 मार्च 2026 को जगताप ने कथित तौर पर करार और रसीद रद्द कर दी तथा 2.35 करोड़ रुपये की पूरी रकम बैंक डिमांड ड्राफ्ट के जरिए वापस कर दी। इसके बाद 30 मार्च को एक समाचार पत्र में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर सौदा रद्द होने की जानकारी भी दी गई।
मामले में नया मोड़ तब आया जब जगताप को कथित तौर पर पता चला कि उसी जमीन के एक हिस्से पर अक्षय रमेश मोरे नामक व्यक्ति अधिकार का दावा कर रहा है। दिसंबर 2025 में अधिवक्ता के माध्यम से भेजे गए कानूनी नोटिस में मोरे ने दावा किया कि चाकणकर ने जुलाई 2022 में उसे 30 आर जमीन बेचने का समझौता किया था और इसके बदले 20 लाख रुपये लिए थे।
जगताप ने पुलिस शिकायत में दावा किया कि उनका मोरे से कभी कोई लेन-देन या परिचय नहीं रहा और चाकणकर को उनकी जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का अधिकार भी नहीं था। इसके बाद मोरे ने 2 मार्च 2026 को अदालत में दीवानी मुकदमा दायर किया।
शिकायत के अनुसार, अदालत से संबंधित दस्तावेजों और नोटिस की जांच के दौरान जगताप को कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें 16 जुलाई 2022 का एक समझौता दिखाया गया था। जगताप का आरोप है कि उन्होंने ऐसा कोई समझौता कभी नहीं किया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि चाकणकर और मोरे ने कथित रूप से मिलीभगत कर दस्तावेज तैयार किए और जमीन पर अनधिकृत बिक्री का रास्ता बनाने की कोशिश की।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच में दस्तावेजों की सत्यता, जमीन के अधिकार और कथित लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
नांदेड सिटी पुलिस ने 13 सितंबर 2026 को मामले में अक्षय रमेश मोरे और विक्रम विलास चाकणकर के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 338, 336(2), 318(4), 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस निरीक्षक प्रसाद अरुण राऊत मामले की जांच कर रहे हैं।
राऊत के अनुसार, 93 गुंठे जमीन का सौदा प्रवीण जगताप और विक्रम चाकणकर के बीच हुआ था। बाद में सौदा रद्द कर जगताप ने चाकणकर से प्राप्त रकम वापस कर दी। पुलिस के अनुसार, इसके बावजूद चाकणकर ने कथित तौर पर जमीन अक्षय मोरे को 20 लाख रुपये में बेचने का दावा किया। मोरे को हिरासत में लिया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, विक्रम चाकणकर का नाम इससे पहले भी एक कथित गंभीर आपराधिक मामले में सामने आ चुका है। उन्हें 18 जुलाई को सिंहगढ़ रोड स्थित ब्रह्मा होटल से खेड़ शिवापुर पुलिस चौकी के बीच कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये की लूट के प्रयास से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि, मौजूदा जमीन मामले में चाकणकर पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि कथित जमीन फर्जीवाड़े में अन्य कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं और संबंधित दस्तावेज वास्तव में किस तरह तैयार किए गए।
93 गुंठे जमीन के मूल स्वामित्व और अधिकारों की जांच।
2.35 करोड़ रुपये के भुगतान और वापसी के बैंक रिकॉर्ड की पड़ताल।
16 जुलाई 2022 के कथित समझौते की सत्यता की जांच।
चाकणकर और अक्षय मोरे के बीच कथित लेन-देन की जांच।
जमीन को 20 लाख रुपये में बेचने के दावे की जांच।
मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की पड़ताल।