शिक्षक सीट: कौस्तुभ गावडे को 23,200 वोट मिले।
वोटों का अंतर: सचिन सानप से गावडे करीब 6,200 मतों से आगे रहे।
स्नातक सीट: हर्षदा देशमुख-जाधव ने जीत दर्ज की।
कांग्रेस को झटका: मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर चुनाव हार गए।
Maharashtra MLC Election Result: महाराष्ट्र विधान परिषद के पुणे विभाग की शिक्षक और स्नातक सीटों के नतीजों ने भाजपा, कांग्रेस और महाविकास आघाड़ी के लिए अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावडे की जीत से पार्टी को एक सीट पर सफलता मिली, लेकिन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में महाविकास आघाड़ी की हर्षदा देशमुख-जाधव की जीत ने भाजपा के सामने उम्मीदवार चयन और चुनावी प्रबंधन की समीक्षा का सवाल खड़ा किया है।
वहीं, शिक्षक सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर की हार पार्टी के लिए झटका है। इस तरह, एक सीट पर भाजपा की जीत और दूसरी पर महाविकास आघाड़ी की सफलता के साथ दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे किसी एक दल के पक्ष में एकतरफा रुझान के बजाय अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों को दर्शाते हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कौस्तुभ गावडे की जीत भाजपा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गावडे को 23,200, जबकि शिवसेना समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को 17,000 वोट मिले। दोनों के बीच करीब 6,200 मतों का अंतर रहा।
पहली पसंद के मतों में जीत के लिए आवश्यक कोटा पूरा नहीं होने के कारण बाद के चरणों में प्राथमिकता क्रम के अनुसार मतों की गिनती और हस्तांतरण किया गया। इसके बाद गावडे की जीत की घोषणा हुई। इस चुनाव में पहली पसंद के मतों के साथ ही अगली पसंद के मतों का हस्तांतरण भी निर्णायक रहा।
राज्य में सत्ता में साथ रहने वाली भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच इस सीट पर मुकाबला देखने को मिला। भाजपा ने कौस्तुभ गावडे को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। वहीं, शिवसेना ने शुरुआत में मंगेश चिवटे को उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन बाद में उन्होंने नाम वापस ले लिया।
इसके बाद पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन दिया। सत्तारूढ़ गठबंधन के दो दलों के बीच बनी इस स्थिति ने महायुति के आपसी समन्वय पर सवाल खड़े किए। गावडे की जीत से भाजपा को मजबूती मिली, लेकिन सानप को मिले वोटों के कारण शिवसेना के स्वतंत्र प्रभाव की भी चर्चा होने लगी है।
पूर्व विधायक दत्तात्रय सावंत को भी 10 हजार से अधिक वोट मिले है। उनकी उम्मीदवारी से मतों के विभाजन की चर्चा हुई, लेकिन प्राथमिकता क्रम के अनुसार मतों के हस्तांतरण का पूरा ब्योरा देखे बिना यह तय करना मुश्किल है कि इसका वास्तविक लाभ किसे मिला। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर की हार पार्टी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। चुनावी रणनीति और प्रचार में कमी के कारण कांग्रेस को अपनी सीट गंवानी पड़ी, ऐसी चर्चा राजनीतिक हलकों में है।
शिक्षक सीट पर जीत हासिल करने वाली भाजपा को स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। महाविकास आघाड़ी की हर्षदा देशमुख जाधव की जीत के बाद भाजपा की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से लेकर मतदाता पंजीकरण और प्रचार अभियान तक पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर राजेश पांडे और शरद लाड की उम्मीदवारी को लेकर पहले हुई चर्चाओं ने इस हार के राजनीतिक विश्लेषण को और तेज कर दिया है।
पूर्व विधायक अरुण लाड के बेटे शरद लाड ने भाजपा में प्रवेश के बाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, ऐसी चर्चा थी। लेकिन पार्टी ने अंततः डॉ. स्मिता जाधव को मौका दिया। इससे संभावित दावेदारों में नाराजगी पैदा हुई और उसका प्रचार अभियान पर असर पड़ा या नहीं, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें लगाई जा रही हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता रोहन सुरवसे पाटिल का कहना है कि पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से महायुति के उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे ने कांग्रेस से यह सीट छीनकर हासिल की है, यह गर्व की बात है। उनकी जीत पर उन्हें हार्दिक बधाई! महायुति में भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन तथा कार्यकर्ताओं की मेहनत के कारण ही यह सफलता मिली है।
- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट