

Smita Jadhav Kaustubh Gawade Nomination: पुणे विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. स्मिता योगेश जाधव और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कौस्तुभ गावडे ने सोमवार को विधान भवन में भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया।
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे, प्रदेश महासचिव राजेश पांडे, विधायक हेमंत रासने, महेश लांडगे, अमित गोरखे, भीमराव तापकीर समेत महायुति के कई नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे। पूर्व विधायक शरद लाड ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि भाजपा में बगावत नहीं हुई है। शरद लाड का नामांकन ‘डमी उम्मीदवार’ के रूप में दाखिल कराया गया है। महायुति के सभी घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता अधिकृत उम्मीदवारों के समर्थन में काम करेंगे।
चव्हाण ने कहा कि डॉ. स्मिता जाधव को प्र-कुलगुरु के रूप में काम करने का अनुभव है। उन्हें शैक्षणिक संस्थाओं की समस्याओं और सरकार के साथ समन्वय की प्रक्रिया की जानकारी है। वहीं, कौस्तुभ गावडे लंबे समय से भाजपा में सक्रिय हैं और शिक्षण संस्थाओं तथा शिक्षकों के मुद्दों पर काम कर रहे हैं।
चव्हाण ने कहा कि कई इच्छुक उम्मीदवारों से बातचीत कर उन्हें समझाया गया है और वे महायुति के लिए काम करेंगे। कुछ स्थानों पर पार्टी की ओर से ही ‘डमी’ नामांकन दाखिल करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार समेत महायुति के वरिष्ठ नेता नाराज नेताओं से बातचीत करेंगे।
उन्होंने कहा कि मतदाता पंजीकरण के लिए कार्यकर्ताओं ने मेहनत की है। पुणे के अलावा नागपुर और अमरावती की सीटों पर भी महायुति के नेता और कार्यकर्ता उम्मीदवारों की जीत के लिए एकजुट होकर काम करेंगे।
डॉ. स्मिता योगेश जाधव ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में पिछले 20 वर्षों का अनुभव स्नातकों, युवाओं और नवउद्यमियों के लिए उपयोगी साबित होगा। रोजगार, स्टार्टअप, इन्क्यूबेशन सेंटर और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
पांचों जिलों की जरूरतों के अनुसार स्नातक मतदाताओं की समस्याओं के समाधान के लिए योजना तैयार की जाएगी।
कौस्तुभ गावडे ने कहा कि शिक्षक होने के कारण उन्हें शिक्षकों की समस्याओं की प्रत्यक्ष जानकारी है। पुरानी पेंशन योजना, टीईटी की अनिवार्यता, गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ तथा संचमान्यता के मानदंडों के कारण अतिरिक्त घोषित होने वाले शिक्षकों के मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन समस्याओं को विधान भवन में उठाकर शिक्षकों को न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
नवभारत लाइव के लिये समीर सय्यद की रिपोर्ट