

ब्रह्मज्ञान को सोच और व्यवहार में अपनाने पर जोर।
मुंबई समेत राज्य के हजारों श्रद्धालुओं की वापसी शुरू।
80 कवियों ने नौ भाषाओं में कविताएं पेश कीं।
भक्तों के लिए अस्पताल, एंबुलेंस, लंगर और पेयजल की सुविधाएं रहीं।
79th Nirankari Sant Samagam Samalkha Love Service Humanity: प्रेम, भक्ति, सेवा और मानवता का संदेश देने वाला 79 वां सालाना निरंकारी संत समागम हरियाणा के समालखा में सतगुरु माता सुदीक्षाजी महाराज और निरंकारी राजपिता रमितजी की मौजूदगी में संपन्न हुआ।
समागम के आखिर में सतगुरु माता सुदीक्षाजी महाराज ने संदेश दिया, ब्रह्मज्ञान का असली मतलब उसे जीवन में अपनाना और उसे सोच, व्यवहार और कामों में लागू करना है। इस समागम में शामिल हुए मुंबई समेत महाराष्ट्र के हजारों भक्तों की वापसी की यात्रा शुरू हुई। इस चार दिवसीय समागम में देश-विदेश से लाखों भक्तों ने हिस्सा लिया।
पहले दिन सतगुरु माताजी और निरंकारी राजपिताजी फूलों से सजी पालकी में सवार होकर पहुंचे। निरंकारी इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड आर्ट्स के 600 से ज़्यादा स्टूडेंट्स ने भरतनाट्यम और स्वागत गीत, संगीत पेश किए। सतगुरु माताजी ने कहा कि निराकार परमात्मा को ध्यान में रखते हुए, प्यार, विश्वास और विनम्रता के साथ जीवन जीना ही सच्ची आध्यात्मिक जागृति है।
दूसरे दिन आयोजित भव्य सेवादल रैली में देश-विदेश से हज़ारों सेवादारों ने हिस्सा लिया। एक्सरसाइज़, गेम्स, छोटे नाटकों और कल्चरल प्रोग्राम के ज़रिए अनुशासन, सहयोग और निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया गया। सतगुरु माताजी ने साफ़ किया कि सेवा सिर्फ़ फ़र्ज़ नहीं बल्कि जीवन का एक अहम हिस्सा है। निरंकारी राजपिता रमितजी ने भी जीवन में ब्रह्मज्ञान, प्यार और समर्पण को हमेशा जगाए रखने की अपील की।
तीसरे दिन सतगुरु माताजी ने कहा कि हर हाल में परमात्मा पर भरोसा बनाए रखना, विचार और व्यवहार में सजग रहना और सामाजिक जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना जरूरी है। निरंकारी राजपिता रमितजी ने संदेश दिया कि जहां बदलाव संभव हो, वहां सकारात्मक प्रयास करने चाहिए और जहां बदलाव असंभव हो, वहां स्थिति को स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी समागम में मौजूद रहे और सतगुरु का आशीर्वाद लिया। संत समागम के चारों दिन आयोजित कवि दरबार में बच्चों समेत 80 कवियों ने हिंदी, मराठी, पंजाबी और अंग्रेजी समेत नौ भाषाओं में जागृति विषय पर अपनी लिखी कविताएं पेश कीं।
आधुनिक तकनीक और आकर्षक प्रस्तुतियों से सजी निरंकारी प्रदर्शनी, बच्चों की प्रदर्शनी और संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहीं। लाखों भक्तों की सुविधा के लिए आठ एलोपैथिक और छह होम्योपैथिक अस्पताल, 15 प्राथमिक देखभाल केंद्र, एक कायरोप्रैक्टिक कैंप और 120 बिस्तरों वाला एक अस्थायी अस्पताल बनाया गया।
आपातकालीन सेवाओं के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। इसके अलावा, चार स्थानों पर लंगर, 22 कैंटीन के साथ-साथ दिव्यांग भक्तों के लिए व्हीलचेयर, रहने की जगह, भोजन, पीने का पानी और एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था की गई।
इस प्रकार आध्यात्मिक जागृति, मानव सेवा, समानता और विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाला यह संत समागम भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ। विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और पृष्ठभूमि के भक्तों को एक साथ लाकर प्रेम, एकता और सद्भावना की भावना को मजबूत करने का काम इस निरंकारी संत समागम के माध्यम से किया गया।