पुणे जहरीली शराब कांड की सांकेतिक फोटो  (सोर्स - सोशल मीडिया)
पुणे

पुणे जहरीली शराब कांड: CID ने MCOCA कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट, 22 मौतों के पीछे के सिंडिकेट का पर्दाफाश

Pune Poisonous Liquor Case Chargesheet: पुणे जहरीली शराब कांड में CID ने MCOCA कोर्ट में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। मेथनॉल मिलावट से हुई 22 मौतों के पीछे के सिंडिकेट का पर्दाफाश।

गोरक्ष पोफली

Highlights

  • पुणे जहरीली शराब कांड में CID ने 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

  • मेथनॉल की मिलावट से हुए इस दर्दनाक हादसे में 22 लोगों की मौत हुई।

  • अवैध शराब के निर्माण और सप्लाई करने वाले संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ।

CID Investigation Report Pune Liquor Tragedy: महाराष्ट्र राज्य CID ने पुणे के हडपसर और दापोडी क्षेत्र में हुई दर्दनाक जहरीली शराब मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस साल 26 से 28 मई के दौरान मेथनॉल युक्त जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की जान चली गई थी।

सीआईडी ने MCOCA के तहत गठित विशेष अदालत के समक्ष नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ यह आरोप पत्र पेश किया है। वहीं, मामले का एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है और अदालत ने उसके खिलाफ प्रोक्लेमेशन ऑर्डर जारी किए हैं।

अगस्त 2026 में लागू किया गया था मकोका

इस बहुचर्चित मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार के आदेश पर हडपसर और दापोडी पुलिस से जांच का जिम्मा CID को सौंपा गया था। गहन छानबीन के बाद CID ने अगस्त 2026 में इस अवैध शराब सिंडिकेट के आरोपियों के खिलाफ MCOCA की सख्त धाराएं लगाई थीं।

CID के ADGP सुनील रामानंद के अनुसार, जांच में जहरीली शराब के निर्माण, मेथनॉल की मिलावट से लेकर इसकी स्थानीय बिक्री तक फैले एक पूरे संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।

ऐसे काम करता था जहरीली शराब का सिंडिकेट

महाराष्ट्र राज्य CID की विस्तृत जांच में सामने आया कि इस अवैध गिरोह का मुख्य सरगना दत्ता उर्फ भाऊ लोंढे है, जो अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के पूरे सिंडिकेट का संचालन कर रहा था।

जांच अधिकारियों के अनुसार गिरोह की कार्यप्रणाली इस प्रकार थी-

  • उरुली कांचन से खरीद: कच्ची या अवैध शराब सबसे पहले उरुली कांचन स्थित आरोपी राधेश्याम प्रजापति से खरीदी जाती थी।

  • मेथनॉल की मिलावट: इसके बाद आरोपी योगेश रामचंद्र भानकडे उर्फ सिकंदर राठौड़ इसमें घातक मेथनॉल रसायन की मिलावट करता था।

  • स्थानीय विक्रेताओं को आपूर्ति: जहरीला मिश्रण तैयार होने के बाद इसे हडपसर और दापोडी के स्थानीय विक्रेताओं को आपूर्ति कर आम लोगों को बेचा जाता था।

भिवंडी गोदाम और नवी मुंबई में छापेमारी

जांच एजेंसी ने जहरीली शराब में मिलाए जाने वाले मेथनॉल के मुख्य स्रोत का भी पता लगा लिया। मेथनॉल की आपूर्ति भिवंडी स्थित एक कंपनी के गोदाम के जरिए की जा रही थी।

CID की टीम ने भिवंडी स्थित गोदाम और नवी मुंबई में कंपनी के मुख्य कार्यालय पर छापेमारी कर कंपनी के मालिक अरुण चौबे और उनके बेटे अभिषेक चौबे को अवैध रूप से जहरीला रसायन उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

फरार आरोपी की तलाश में जुटी CID

सीआईडी ने पूरे सप्लाई चेन और अवैध बिक्री में शामिल सभी नौ आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। हालांकि, गिरोह का एक अन्य संदिग्ध अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। अदालत द्वारा आरोपी के खिलाफ उद्घोषणा पत्र जारी करने के बाद सीआईडी की विशेष टीम उसकी धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।

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