

Pimpri Chinchwad News In Hindi: पिंपरी-चिंचवड शहर के प्रवेश द्वार के रूप में पहचाना जाने वाला दापोडी प्रभाग आज भी विकास की राह देख रहा है।
किसी समय ब्रिटिश काल के महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों का केंद्र रहा यह क्षेत्र, समय के साथ झुग्गी-बहुल इलाके के रूप में तब्दील हो गया। स्थानीय नागरिकों में यह तीव्र भावना है कि चुनाव आते ही "दापोडी का विकास कब होगा?" जैसे नारे तो सुनाई देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह क्षेत्र फिर से उपेक्षित हो जाता है।
अन्य प्रभागों की तुलना में दापोडी का सर्वांगीण विकास नहीं हुआ है, यह वास्तविकता आज भी स्पष्ट दिखाई देती है। इस बार का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि दापोडी के भविष्य की दिशा तय करने वाला होगा।
मतदाता उसी पर भरोसा करेंगे जो केवल वादे नहीं, बल्कि काम करने की क्षमता दिखाएगा। भारी मात्रा में बढ़ी हुई झुग्गियां, अनधिकृत निर्माण और अत्यंत संकरी गलियों के कारण यहां विकास कार्यों में बड़ी अड़चनें आती हैं। किसी भी बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट को लागू करते समय प्रशासन को बाधाओं की एक लंबी श्रृंखला का सामना करना पड़ता है।
इस प्रभाग में शंकरवाड़ी, सरिता संगम सोसाइटी, शास्त्रीनगर, केशवनगर, कासारवाड़ी, कुंदननगर, फुगेवाड़ी, संजयनगर, दापोडी, सिद्धार्थनगर, गणेशनगर, सुंदरबाग कॉलोनी और एसटी वर्कशॉप जैसे इलाके शामिल हैं, जो पवना नदी के तट से लेकर सैन्य क्षेत्र और रेलवे लाइन तक फैले हुए हैं। यहां की भौगोलिक बनावट और जनसंख्या का घनत्व विकास के लिए एक बड़ी चुनौती है।
उम्मीदवारों को विकास का ठोस खाका पेश करने की चुनौती इस प्रभाग में मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई और अन्य समुदायों के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है, जो चुनाव परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यहां के अधिकांश नागरिक श्रमिक या अल्प आय वर्ग से हैं, इसलिए वे एक ऐसे नेता की तलाश में हैं जो उनके दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझा सके।
बेरोजगारी, अस्वच्छता के कारण बीमारियां, पानी की कमी, मानसून में बाढ़ की स्थिति और संकरी सड़कें जैसी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। इस बार उम्मीदवारों के सामने राजनीति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास का ठोस खाका पेश करने की चुनौती है।
दापोड़ी के पास रेलवे, पुराना मुंबई राजमार्ग और मेट्रो जैसे परिवहन के बेहतरीन साधन हैं। इसके बावजूद आरक्षित भूमि पर बढती झुग्गियां, अव्यवस्थित शहरी नियोजन और प्रशासन की उदासीनता के कारण यहाँ का विकास रुक गया है। नागरिक मांग कर रहे हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि झुग्गी पुनर्वास योजना, सड़क चौड़ीकरण और बुनियादी सुविधाओं के सुद्धीकरण पर गंभीरता से ध्यान दें।
पुणे से नवभारत लाइव के लिए अमोल यलमार की रिपोर्ट