सिंहगढ़ किले पर बिना पुरातत्व विभाग की अनुमति साइकिल रेस आयोजित।
9 देशों के 28 साइकिल चालकों ने लिया हिस्सा, पर्यटकों को हुई परेशानी।
आयोजकों को नोटिस, भारी जुर्माने और सख्त कार्रवाई की तैयारी।
Sinhagad Fort Downhill Cycle Race: पुणे के ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले पर आयोजित माउंटेन डाउनहिल साइकिल रेस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 22 से 25 अक्टूबर तक आयोजित इस प्रतियोगिता के लिए वन विभाग से अनुमति ली गई थी, लेकिन किले के पुणे दरवाजा क्षेत्र में रेस कराने के लिए पुरातत्व विभाग की मंजूरी नहीं ली गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने आयोजकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और भारी जुर्माना लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
‘जोरावन’ समूह की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत सहित नौ अन्य देशों के कुल 28 साइकिल चालकों ने भाग लिया। रेस पुणे दरवाजा से आतकरवाड़ी मार्ग पर आयोजित की गई थी। शुरुआती मंच बनाने के लिए पुणे शहर दरवाजा के पास लकड़ी का ढांचा भी खड़ा किया गया था।
पुणे दरवाजा और उसके नीचे की सीढ़ियों का लगभग 50 से 100 मीटर का हिस्सा पुरातत्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस संरक्षित ऐतिहासिक क्षेत्र में प्रतियोगिता आयोजित करने से पहले आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
प्रतियोगिता के दौरान सप्ताहांत और रविवार की छुट्टी के कारण किले पर पर्यटकों की भारी भीड़ थी। ऐसे में तेज गति से साइकिल चलाने के कारण पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। रेस के दौरान मुख्य पैदल मार्ग बंद होने से पर्यटकों और सुबह व्यायाम के लिए आने वाले स्थानीय नागरिकों को भी परेशानी हुई।
आयोजकों को निर्देश दिए गए थे कि शनिवार और रविवार को पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए और सुरक्षा की जिम्मेदारी आयोजक संस्था की होगी। इसके बावजूद रास्ता बंद होने से अव्यवस्था की स्थिति बनने की शिकायत सामने आई। प्रतियोगिता के बारे में स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को पहले से पर्याप्त जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठा।
पुरातत्व विभाग के सह-संचालक डॉ. विलास वाहने ने स्पष्ट किया कि विभाग ने प्रतियोगिता के लिए कोई अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि आयोजकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है और संबंधित लोगों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उप-वनसंरक्षक अभिजीत वायकोस के अनुसार, वन विभाग ने अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सख्त शर्तों के साथ केवल अपने अधिकार क्षेत्र में रेस आयोजित करने की अनुमति दी थी। पुरातत्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में प्रतियोगिता कराने की अनुमति नहीं दी गई थी। शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।