

कर्जत में टोरेंट पावर की पंप स्टोरेज परियोजना पर पेड़ कटाई को लेकर विवाद।
सीएम फडणवीस ने परियोजना को पर्यावरण अनुकूल बताया, राज ठाकरे बुधवार को जनसभा करेंगे।
आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार का दावा, परियोजना के लिए 90 हजार पेड़ काटे जाएंगे।
Maharashtra Pumped Storage Project: रायगढ़ जिले की कर्जत तहसील में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर क्षेत्र के पास प्रस्तावित टोरेंट पावर परियोजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई की आशंका को लेकर ठाकरे बंधुओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने सोमवार को कर्जत पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत की। वहीं, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे बुधवार को रायगढ़ में जनसभा को संबोधित करेंगे।
मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से परियोजना को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पंप स्टोरेज परियोजना पर्यावरण के अनुकूल है। उनके मुताबिक, सौर और पवन ऊर्जा से लगातार बिजली उत्पादन संभव नहीं होता, क्योंकि शाम के समय सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं रहती और हवा नहीं चलने पर पवन चक्कियां बिजली नहीं बना पातीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंप स्टोरेज तकनीक सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में मदद करती है। इससे बिजली ग्रिड को स्थिर रखने और जरूरत के समय नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। उन्होंने परियोजना से मिलने वाली बिजली को स्वच्छ ऊर्जा बताया।
आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने दावा किया है कि परियोजना के लिए 34 हजार नहीं, बल्कि करीब 90 हजार पेड़ काटे जा सकते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र राज्य में प्रस्तावित 23 पंप स्टोरेज परियोजनाओं के लिए भी अलग-अलग स्थानों पर बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई की आशंका जताई है।
कुंभार ने इन परियोजनाओं से संबंधित दस्तावेज सोशल मीडिया पर साझा किए हैं। हालांकि, पेड़ों की कटाई की वास्तविक संख्या और संबंधित मंजूरियों की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भीमाशंकर क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की भरपाई के लिए कोयना बांध क्षेत्र के दो गांवों में वृक्षारोपण की योजना बताई गई है। कुंभार का आरोप है कि अब तक वहां एक भी पेड़ नहीं लगाया गया है।
परियोजना को लेकर पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा जरूरतों के बीच बहस तेज हो गई है। आदित्य ठाकरे के स्थानीय लोगों से संवाद के बाद अब राज ठाकरे की जनसभा पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हैं। इस बीच परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव, पेड़ों की कटाई और वृक्षारोपण की स्थिति को लेकर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।