Pune PMC Tanker Watering Plants In Rain: बारिश का मौसम हो, आसमान से बादल दिल खोलकर बरस रहे हों और चारों तरफ पानी ही पानी हो, ऐसे में अगर कोई आपसे कहे कि चलो, पौधों को पानी पिलाकर आते हैं, तो आप निश्चित ही उसे पागल समझेंगे। लेकिन रुकिए! यह विचार आपके लिए अजीब हो सकता है, पर पुणे महानगरपालिका के लिए यह उनका नियत कर्म और ड्यूटी है। पुणे से एक ऐसी खबर और वीडियो सामने आया है, जिसने तर्क और समझदारी की तमाम सीमाओं को पार कर दिया है।
पुणे में इन दिनों अच्छी बारिश हो रही है। सड़कों पर पानी भरा है और प्रकृति खुद पौधों की प्यास बुझा रही है। लेकिन पुणे मनपा के कर्मचारियों को शायद प्रकृति पर भरोसा नहीं है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो बिजली की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि मूसलाधार बारिश के बीच पुणे मनपा का एक वॉटर टैंकर सड़क के डिवाइडर पर लगे पौधों को पानी दे रहा है। जी हां, ऊपर से भगवान पानी बरसा रहे हैं और नीचे से मनपा के कर्मचारी पाइप थामे पौधों को नहला रहे हैं।
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, नेटिजन्स ने पुणे मनपा की क्लास लगानी शुरू कर दी। लोग इस अजीबोगरीब काम पर ठहाके भी लगा रहे हैं और साथ ही सरकारी संसाधनों की बर्बादी पर अपना गुस्सा भी जाहिर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह स्मार्ट सिटी का कोई नया और एडवांस सिंचाई मॉडल है? कुछ यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि शायद मनपा के पास इतना ज्यादा पैसा और पानी आ गया है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इसे कहां ठिकाने लगाएं।
इस मुद्दे पर राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। विधायक रोहित पवार ने इस हास्यास्पद स्थिति का वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते हुए पुणे मनपा पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, ऊपर से बारिश हो रही है और नीचे टैंकर से पौधों को पानी दिया जा रहा है... पुणे मनपा शायद दुनिया की पहली ऐसी मनपा होगी जो ऐसा कारनामा कर रही है!
रोहित पवार ने आगे प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि लूटने की भी कोई सीमा होनी चाहिए। उन्होंने मराठी में अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कम से कम थोड़ी तो लज्जा बाकी रखो। उनका इशारा साफ था कि यह केवल एक गलती नहीं बल्कि जनता के पैसे की सरेआम बर्बादी और भ्रष्टाचार का एक नमूना है।
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यह घटना पुणे मनपा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या टैंकरों के फेरे केवल कागजों पर दिखाने के लिए यह सब किया जा रहा है? क्या ठेकेदारों को भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बारिश में भी पानी छिड़कना अनिवार्य है? यह इल्लॉजिकल सिंचाई तर्क किसी के गले नहीं उतर रहा है।
कुल मिलाकर, पुणे का यह रेनवाटर पैराडॉक्स न केवल चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि यह सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और मूर्खतापूर्ण फैसलों का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है। अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के वायरल होने और रोहित पवार की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद क्या पुणे प्रशासन अपनी इस अनोखी सिंचाई तकनीक को रोकता है या नहीं।