पुणे महानगरपालिका (सौ. सोशल मीडिया ) 
पुणे

पर्वती में 32.83 करोड़ के विकास कार्यों पर रोक, मंत्री माधुरी मिसाल ने आयुक्त पर उठाए सवाल

PMC में 32.83 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को अंतिम मंजूरी से पहले वापस लेने पर सियासी घमासान छिड़ गया है। मंत्री माधुरी मिसाल ने आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक निर्णय बताया।

अपूर्वा नायक

Pune Municipal Corporation News In Hindi: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) की राजनीति में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सत्ता पक्ष के भीतर मची खींचतान अब खुलकर सड़कों पर आने लगी है।

मामला पर्वती विधानसभा क्षेत्र के 32.83 करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर रोक लगाने से जुड़ा है, जिसने राज्य मंत्री और स्थानीय विधायक माधुरी मिसाल को नाराज कर दिया है। मिसाल ने सीधे आयुक्त नवल किशोर राम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

क्या है पूरा विवाद?

पर्वती निर्वाचन क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए माधुरी मिसाल ने लंबे समय से फंड की मांग की थी। 16 सितंबर 2025 को अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद, मनपा प्रशासक ने महाराष्ट्र महानगर पालिका अधिनियम 1949 की धारा 72 (ब) के तहत 21 विभिन्न विकास कार्यों के लिए 32।83 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दी थी। 6 फरवरी को स्थायी समिति ने भी इन प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी थी और इन्हें अंतिम मुहर के लिए 18 फरवरी की जनरल बॉडी (आमसभा) की कार्यसूची में शामिल किया गया था। लेकिन ऐन वक्त पर, यानी 17 फरवरी को, आयुक्त ने नगर सचिव को पत्र भेजकर इन प्रस्तावों को वापस लेने का आदेश दे दिया।

'तकनीकी सुधार' या राजनीतिक साजिश ?

16 सितंबर 2025 को अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद प्रशासन ने 21 विभिन्न विकास कार्यों को मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में यह प्रस्ताव वापस ले लिया गया। इसके पीछे तकनीकी और प्रशासनिक सुधार का हवाला दिया गया। हालांकि, माधुरी मिसाल ने इस स्पष्टीकरण को सिरे से खारिज कर दिया है।

विपक्ष ने भी घेरा, प्रशासन की चुप्पी

एक तरफ जहां भाजपा के भीतर इस 'कोल्ड वार से खलबली मची है। वहीं विपक्ष ने इस मौके को भुनाना शुरू कर दिया है। विपक्ष के नेता एडवोकेट निलेश निकम ने आयुक्त के निर्णय का समर्थन करते हुए चुटकी ली है।

निकम का कहना है कि आयुक्त को अपने अधिकारों का उपयोग करने का पूरा हक है और यदि विधायक को निधि चाहिए, तो उन्हें राज्य सरकार से लानी चाहिए, क्योंकि सरकार पर मनपा का भारी बकाया है। दूसरी ओर, आयुक्त नवल किशोर राम ने फिलहाल इस मामले में 'नो कमेंट्स' की नीति अपनाई है। उन्होंने मिसाल का पत्र मिलने की बात से भी इनकार किया है, जिससे भ्रम की स्थिति और बढ़ गई है।

आयुक्त को लिखा कड़ा पत्र, पूछा सवाल

  • वे कौन से 'तकनीकी सुधार' थे जो स्थायी समिति की मंजूरी के समय ध्यान में नहीं आए?
  • धारा 72 (ब) के तहत आए दो प्रस्तावों में से केवल पर्वती का ही प्रस्ताव क्यों हटाया गया?
  • क्या स्थायी समिति द्वारा अनुशंसित प्रस्ताव को इस तरह वापस लेना नियम विरुद्ध नहीं है?

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