पुणे में 32वीं किला निर्माण प्रतियोगिता, बच्चों और युवाओं में उत्साह।
सिंहगढ़, राजगढ़ और सुवर्णदुर्ग समेत ऐतिहासिक किलों की प्रतिकृतियां तैयार।
पुणे मनपा ने प्रतिभागियों को मिट्टी, ईंट और पत्थर उपलब्ध कराए।
Pune Fort Making Competition: पुणे में किसी के हाथों में मिट्टी और ईंटें हैं, तो कोई ऐतिहासिक किले का नक्शा देखकर उसकी बनावट समझने में जुटा है। कोई सिंहगढ़ की प्रतिकृति तैयार कर रहा है, तो कोई सुवर्णदुर्ग और पद्मदुर्ग को वास्तविक स्वरूप देने में लगा है।
छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य और हिंदवी स्वराज के इतिहास से जुड़े किलों को साकार करने का यह उत्साह इन दिनों पुणे के जंगली महाराज रोड स्थित छत्रपति संभाजी महाराज उद्यान में देखने को मिल रहा है।
उद्यान में बच्चे और युवा मिट्टी, ईंटों और पत्थरों की मदद से महाराष्ट्र के ऐतिहासिक किलों के मॉडल तैयार कर रहे हैं। सिंहगढ़, राजगढ़, पद्मदुर्ग और सुवर्णदुर्ग जैसे किलों को बनाने के लिए प्रतिभागी नक्शों और पुस्तकों से जानकारी जुटा रहे हैं।
किले की तटबंदी, बुर्ज, प्रवेश द्वार और भौगोलिक बनावट को समझकर उसकी प्रतिकृति तैयार की जा रही है। दोस्तों के साथ मिलकर काम करने के दौरान बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।
पुणे महानगरपालिका के उद्यान विभाग और वृक्ष प्राधिकरण की ओर से गुरुवार, 5 नवंबर को 32वीं किला निर्माण प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए संभाजी महाराज उद्यान में तैयारियां शुरू हैं। मनपा की ओर से प्रतिभागियों को मिट्टी, ईंटें और पत्थर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे अपनी कल्पना के अनुसार ऐतिहासिक किलों की प्रतिकृतियां बना सकें।
प्रतियोगी स्मरण इंगले, ऋतुराज ढगे और कार्तिक ने बताया कि उन्होंने सिंहगढ़ किला देखा है, इसलिए इस बार उसकी प्रतिकृति बनाने का निर्णय लिया। पिछले साल उन्होंने राजगढ़ का मॉडल तैयार किया था। इस बार भी सभी दोस्त एक-दूसरे की मदद से किले का निर्माण कर रहे हैं। उनके मुताबिक, किले की वास्तविक बनावट को समझकर उसे तैयार करना बेहद आनंददायक अनुभव है।
पुणे मनपा के उद्यान अधीक्षक अशोक घोरपडे ने बताया कि पिछले 32 वर्षों से इस प्रतियोगिता और प्रदर्शनी की परंपरा जारी है। हर साल बच्चे और युवा उत्साह के साथ इसमें हिस्सा लेते हैं। इससे उन्हें शिवकालीन इतिहास और किलों की स्थापत्य कला को समझने का अवसर मिलता है।
प्रतिभागी दिग्विजय मोरे ने बताया कि वह अपने दोस्तों आयुष आटोले, विवेक आटोले, सोहम गावडे और वेदांत चांदणे के साथ पिछले दो दिनों से सुवर्णदुर्ग की प्रतिकृति बना रहे हैं। सभी ने किले की तटबंदी, प्रवेश द्वार और बुर्जों का अध्ययन कर काम बांट लिया है। नक्शों और किताबों की मदद से वे इस ऐतिहासिक किले को साकार करने में जुटे हैं।