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Pune Municipal Elections के बाद नई चुनौती, स्वीकृत पार्षद पदों को लेकर दलों में असंतोष की आशंका

Maharashtra News: पुणे महानगरपालिका चुनाव में टिकट से वंचित कार्यकर्ताओं को स्वीकृत पार्षद बनाने का वादा अब पार्टियों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। सीमित कोटे ने नेताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

अपूर्वा नायक

Pune News In Hindi: पुणे महानगर पालिका चुनाव में उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज हुए कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए राजनीतिक दलों ने उन्हें 'स्वीकृत पार्षद' (नॉमिनेटेड कॉरपोरेटर) बनाने का आश्वासन दिया है।

लेकिन शासन द्वारा निर्धारित कोटे के अनुसार भाजपा को सात, राष्ट्रवादी कांग्रेस को दो और कांग्रेस को केवल एक स्वीकृत नगरसेवक पद मिलने वाला है।

ऐसे में अपने चहेतों को इन पदों पर बिठाना पार्टी नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। चुनाव के दौरान टिकट वितरण को लेकर पहले ही भारी नाराजगी देखनी पड़ी थी और अब स्वीकृत नगरसेवक पदों को लेकर भी असंतोष उभरने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक पुनर्वास का जरिया

महानगरपालिका के कामकाज में विभिन्न विशेषज्ञों और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों का अनुभव शामिल हो, इस उद्देश्य से स्वीकृत पार्षदों के चयन का प्रावधान किया गया है। लेकिन असलियत में इस मुख्य उद्देश्य को दरकिनार कर, पार्टी कार्यकर्ताओं के राजनीतिक पुनर्वास के लिए इन पदों का इस्तेमाल किया जाता है। इन पार्षदों को सदन में मतदान का अधिकार नहीं होता और न ही वे किसी अन्य वैधानिक पद पर नियुक्त हो सकते हैं।

पुणे शहर में नाराज नेताओं से बढ़ी मुश्किलें

लेकिन बजट में उनके कार्यों के लिए एक निश्चित राशि का प्रावधान जरूर किया जाता है। पुणे मनपा के चुनाव में इस बार 165 नगरसेवक बुनकर आप हैं। टिकट वितरण के समय, विशेष रूप से भाजपा मैं इच्छुकों की संख्या बहुत अधिक थी। टिकट नहीं मिलने पर कई कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय पर्चा भरकर बगावत कर दी थी।

उस समय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझा-बुझाकर और भविष्य में मनपा में स्वीकृत पार्षद पद। वृक्ष प्राधिकरण समिति या वार्ड स्तर पर स्वीकृत सदस्य पद देने का वादा करके उनकी बगावत शांत कराई थी। अब जब नियुक्तियों का समय करीब है, तो सीमित सीटों के कारण नेताओं की कसौटी होनी तय है।

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