पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

पुणे महानगरपालिका में नई परिषद के बाद बढ़े खर्च, सभागार और गुटनेताओं के कार्यालयों पर करोड़ों खर्च

Pune MNC में नई परिषद के गठन के बाद खर्चों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुख्य सभागार के डिजिटल ऑडियो सिस्टम की मरम्मत पर करीब 62.85 लाख रुपये खर्च किए जाने से प्रशासन की मंशा पर चर्चा तेज हो गई है।

अपूर्वा नायक

Pune Municipal Corporation Audio System Repair: लोकतंत्र की 'घरवापसी' के साथ ही पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) में खचर्चों का सिलसिला तेज हो गया है।

नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के स्वागत और प्रशासनिक व्यवस्था को नया रूप देने के नाम पर मनपा प्रशासन ने तिजोरी के दरवाजे खोल दिए हैं। हाल ही में मुख्य सभागार के डिजिटल ऑडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम की मरम्मत और रखरखाव पर करीब 62 लाख 85 हजार रुपये खर्च किए जाने से प्रशासन की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।

शहर की सड़कों पर गड्डों और मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से जूझ रही जनता अब यह पूछ रही है कि यह चमक-धमक उनके मोहल्लों तक कब पहुंचेगी या फिर यह केवल मनपा के दफ्तरों तक ही सीमित रहने वाली है।

बता दें कि पुणे मनपा की नई विस्तारित इमारत के मुख्य सभागार में डिजिटल ऑडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम की मरम्मत के लिए विद्युत विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव में माइक्रोफोन, वायरलेस माइक, एम्प्लीफायर, डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और ऑडिटोरियम के ऑडियो सिस्टम की सर्विसिंग के साथ-साथ नई वायरिंग का काम शामिल किया गया था।

विभाग ने इस काम के लिए करीब 63 लाख 84 हजार रुपये का अनुमानित बजट तय किया था। टेंडर प्रक्रिया के बाद कुछ प्रतिशत कम दर पर 62 लाख 85 हजार रुपये का प्रस्ताव स्थायी समिति ने मंजूर कर दिया।

गुटनेताओं के कार्यालयों का भी होगा नवीनीकरण

  • इधर, मनपा चुनाव के बाद नगरसेवकों के कार्यभार संभालते ही विभिन्न दलों और पदाधिकारियों के कार्यालयों के नवीनीकरण का काम भी तेजी से शुरू हो गया है। सदन के नेता से लेकर विभिन्न दलों के गटनेताओं तक के कार्यालयों में मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
  • सूत्रों के अनुसार, इन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे है। नई बैठने की व्यवस्था से लेकर वास्तु के अनुसार प्रवेश द्वार की दिशा बदलने तक कई कामों पर बड़े पैमाने पर खर्च किया जा रहा है, जिससे मनपा के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

पुणे में था चार वर्षों तक 'प्रशासक राज'

हालांकि, इस खर्च को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। चार वर्षों तक 'प्रशासक राज' के दौरान मुख्य सभागार बंद रहा था। ऐसे में, कुछ साल पहले लगाए गए ऑडियो सिस्टम की इतनी महंगी मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ी, इस पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

Explainer: क्या वाकई ग्रीन हैं ग्रीन क्रैकर्स, प्रदूषण, सेहत और जेब पर कितना असर? आसान भाषा में समझें

ओडिशा सरकार का शिक्षकों को बड़ा तोहफा, प्रभारी प्रधानाचार्यों को हर महीने मिलेगा 10 हजार रुपये तक भत्ता

Festival Business: दिवाली पर देश में 7 लाख करोड़ रुपये का कारोबार, कैट ने 15-18% वृद्धि की जताई उम्मीद

प्रधानमंत्री आवास योजना: नई लिस्ट में नाम आया या नहीं, ऑनलाइन आवेदन कैसे करें; जानें सारी डिटेल

Platform Ticket: दिवाली और छठ पर रेलवे स्टेशनों में एंट्री होगी मुश्किल? 15 नवंबर तक प्लेटफॉर्म टिकट पर रोक