

कैट ने 70 शहरों के व्यापारिक संगठनों के सर्वे के आधार पर अनुमान जारी किया।
दिल्ली में दिवाली सीजन के दौरान करीब ₹1 लाख करोड़ के कारोबार की उम्मीद।
किराना और एफएमसीजी की हिस्सेदारी 12%, जबकि सोना-चांदी की 10% रह सकती है।
Business India Trade Growth: भारत में दिवाली केवल रोशनी, खुशियों और परंपराओं का पर्व नहीं, बल्कि देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बड़ा आर्थिक महोत्सव बन चुकी है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2026 में नवरात्रि से दिवाली तक देशभर में त्योहारी कारोबार ₹7 लाख करोड़ के पार पहुंच सकता है। यह पिछले वर्ष के ₹6.05 लाख करोड़ के रिकॉर्ड कारोबार की तुलना में लगभग 15 से 18 प्रतिशत अधिक होगा।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार देश के 70 शहरों में व्यापारिक संगठनों के साथ किए गए अध्ययन के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि अकेले दिल्ली में इस वर्ष दिवाली सीजन के दौरान करीब एक लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद है।
कैट के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर ने कहा कि दिवाली देश की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था, उद्यमशीलता और व्यापारिक क्षमता का प्रतीक बन गई है। इस दौरान होने वाली खरीदारी से निर्माता, थोक एवं खुदरा व्यापारी, कारीगर, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र सहित अर्थव्यवस्था के अनेक हिस्सों को गति मिलती है।
कैट के आकलन के अनुसार, त्योहारी कारोबार में किराना एवं एफएमसीजी की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत, सोना-चांदी एवं आभूषण की 10 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स की 8 प्रतिशत तथा कंज्यूमर ड्यूरेबल और रेडीमेड गारमेंट्स की हिस्सेदारी 7-7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गिफ्ट आइटम्स का हिस्सा भी 7 प्रतिशत, होम डेकोर और फर्नीचर का 5-5 प्रतिशत, मिठाई एवं नमकीन का 5 प्रतिशत तथा अन्य वस्तुओं और संबंधित कारोबार का हिस्सा 19 प्रतिशत रहने की संभावना है।
त्योहारी सीजन में परिवहन, ई-कॉमर्स डिलीवरी, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, होटल, रेस्तरां, पर्यटन, कैटरिंग और इवेंट मैनेजमेंट जैसी सेवाओं की मांग भी बढ़ जाती है। कैट के मुताबिक, पिछले वर्ष सेवा क्षेत्र का कारोबार लगभग 65 हजार करोड़ रुपये था, जो इस वर्ष 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि के साथ 80 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
खंडेलवाल ने कहा कि देश के 9 करोड़ से अधिक व्यापारियों और छोटे कारोबारियों की भूमिका रोजगार सृजन तथा आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण है। दिवाली के दौरान छोटे व्यापारियों, महिला उद्यमियों, कारीगरों और एमएसएमई को कारोबार बढ़ाने के अवसर मिलते हैं। साथ ही बड़ी संख्या में अस्थायी रोजगार भी पैदा होता है।
उन्होंने उपभोक्ताओं से ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना के अनुरूप भारतीय निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देने तथा स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील की। उनके अनुसार, स्वदेशी उत्पादों की खरीद भारतीय विनिर्माण, स्थानीय कारोबार और रोजगार को मजबूती देने में महत्वपूर्ण योगदान करती है।