

प्रभारी प्रधानाचार्यों को हर महीने मिलेंगे 5,000 से 10,000 रुपये तक।
योजना पर सालाना करीब 6 करोड़ रुपये खर्च करेगी ओडिशा सरकार।
गृह जिले से बाहर काम करने पर 7,000 और दुर्गम क्षेत्रों में 10,000 रुपये मिलेंगे।
Odisha Government Is Providing An Incentive Allowance To Principals: ओडिशा सरकार ने निजी सहायता प्राप्त कॉलेजों में कार्यरत प्रभारी प्रधानाचार्यों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इन प्रधानाचार्यों के लिए 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक के मासिक प्रोत्साहन भत्ते को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले से राज्य के करीब 641 प्रभारी प्रधानाचार्यों को सीधा लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि प्रोत्साहन राशि उनकी तैनाती के स्थान और गृह जिले से दूरी के आधार पर तय की जाएगी।
राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित कॉलेजों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने के लिए शिक्षकों को प्रोत्साहित करने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त आर्थिक प्रोत्साहन मिलने से शिक्षक प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी लेने के लिए आगे आएंगे। इससे कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
गृह जिले से बाहर तैनाती पर मिलेंगे 7 हजार रुपये
सरकार की ओर से तय व्यवस्था के अनुसार, अपने गृह जिले से बाहर तैनात प्रभारी प्रधानाचार्यों को हर महीने 7,000 रुपये का प्रोत्साहन भत्ता दिया जाएगा। वहीं, भौगोलिक रूप से दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में स्थित कॉलेजों में काम करने वाले प्रभारी प्रधानाचार्यों को अधिकतम 10,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। हालांकि, दुर्गम क्षेत्र में तैनाती का निर्धारण एक समिति के मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा। इसके अलावा, इस योजना के तहत न्यूनतम प्रोत्साहन राशि 5,000 रुपये निर्धारित की गई है।
641 प्रभारी प्रधानाचार्यों को मिलेगा फायदा
इस योजना का लाभ 488 और 662 श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले निजी सहायता प्राप्त कॉलेजों में कार्यरत लगभग 641 प्रभारी प्रधानाचार्यों को मिलेगा। राज्य सरकार इस योजना पर हर साल करीब 6 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके जरिए सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के लिए आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करना है।
फिलहाल इस फैसले को लागू करने के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की जानी बाकी है। अधिसूचना जारी होने के बाद प्रोत्साहन भत्ते का भुगतान शुरू होगा। मोहन चरण माझी की सरकार के इस कदम को उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से संचालित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।