पार्थ पवार (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

Maharashtra Nikay Chunav की गहमागहमी में दबा मुंढवा भूमि घोटाला, विपक्ष ने उठाए सवाल

Pune Municipal Election की सरगर्मी के बीच मुंढवा भूमि घोटाले का मामला एक बार फिर चर्चा से बाहर होता दिख रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि चुनावी शोर में इस संवेदनशील मुद्दे को दबाया जा रहा है।

अपूर्वा नायक

Parth Pawar Land Scam: निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच पुणे के मुंढवा भूमि घोटाले से जुड़ा मामला एक बार फिर हाशिये पर जाता नजर आ रहा है।

जिस प्रकरण में कुछ समय पहले तक तीखी राजनीतिक बयानबाजी और जांच की मांगें उठ रही थीं, वह अब चुनावी प्रचार, टिकट वितरण और गठबंधन की चर्चाओं में दबकर रह गया है।

विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष ने जानबूझकर इस संवेदनशील मुद्दे को चुनावी शोर में दबाने की रणनीति अपनाई है। यह घोटाला राकां के युवा नेता पार्थ पवार के नाम से जुड़े होने के कारण खासा चर्चा में आया था।

आरोप लगाए गए थे कि मुंढवा क्षेत्र की बहुमूल्य जमीन से जुड़े लेन-देन में नियमों की अनदेखी हुई और प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाया गया। सामाजिक कार्यकताओं और विपक्षी नेताओं ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

कार्रवाई भी धीमी

चुनावों को घोषणा के बाद राजनीतिक एजेंडा तेजी से बदल गया। सत्ताधारी और विपक्षी दलों का पूरा फोकस चुनावी रणनीति, प्रचार सभाओं और सीटों के गणित पर केंद्रित हो गया। नतीजतन, भूमि घोटाले से जुड़े सवाल अब सार्वजनिक बहस में कम सुनाई दे रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी धीमी पड़ गई है।

चुनावों से लेना-देना नहीं

जानकार बताते है कि चुनावी दौर में ऐसे विवादित मुद्दे अक्सर पीछे छूट जाते है। क्योंकि दल मतदाताओं को साधने वाले मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। वहीं। सत्तारूढ़ खेमे का तर्क है कि जांच प्रक्रिया अपने तय कानूनी रास्ते पर चल रही है और चुनावों से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

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