महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढ़े (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

पुणे के गुरु नानक डेयरी फूड पॉइजनिंग केस, हाई कोर्ट ने FDA को निलंबन हटाकर 5 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश

Pune Guru Nanak Dairy: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरु नानक डेयरी का लाइसेंस बहाल कर FDA को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। FDA आयुक्त तुकाराम मुंधे ने फैसले पर कानूनी विकल्प की बात कही।

आलोक उमाकृष्ण

Bombay High Court Order: पुणे के वडगांव शेरी स्थित गुरु नानक डेयरी एंड स्वीट्स को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा दुकान का खाद्य लाइसेंस लगातार निलंबित रखने पर सवाल उठाते हुए निलंबन हटाने का निर्देश दिया है।

साथ ही FDA को डेयरी संचालक को ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यह राशि 30 दिनों के भीतर भुगतान करने को कहा गया है। मामला जून में सामने आए कथित फूड पॉइजनिंग प्रकरण से जुड़ा है। इसके बाद 12 जून को FDA ने दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया था।

निरीक्षण के दौरान दुकान में साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़ी कई कमियां पाए जाने का दावा किया गया था। कार्रवाई के बाद दुकान प्रबंधन ने कमियों को दूर करने का अनुपालन रिपोर्ट FDA को सौंपी थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश

इसके बाद 13 जुलाई को FDA की टीम ने दोबारा निरीक्षण किया। इस पुनर्निरीक्षण में दुकान ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े 36 में से 35 मानकों को पूरा किया और करीब 98% अनुपालन पाया गया। इसके बावजूद लाइसेंस का निलंबन जारी रहने पर मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा।

अदालत ने माना कि जब प्रतिष्ठान ने सुरक्षा मानकों का बड़े स्तर पर अनुपालन कर लिया था, तब लाइसेंस का निलंबन लगातार जारी रखना उचित नहीं था। कोर्ट के आदेश के बाद गुरु नानक डेयरी एंड स्वीट्स को दोबारा कारोबार शुरू करने की अनुमति मिल गई है। हालांकि, अदालत का लिखित आदेश अभी सामने आना बाकी है, जिसके बाद मामले की विस्तृत कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

आयुक्त तुकाराम मुंढ़े की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढ़े ने कोर्ट के फैसले पर आश्चर्य जताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला खाद्य विषाक्तता से जुड़ा था और संबंधित मिठाई खाने के बाद कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

मुंधे के अनुसार, प्रयोगशाला रिपोर्ट में खाद्य पदार्थ को 'असुरक्षित' पाया गया था, इसलिए विभाग द्वारा की गई कार्रवाई नियमों के तहत सही थी। उन्होंने कहा कि विभाग अपने रुख पर कायम है और लिखित आदेश मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा।

इसके बाद FDA उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब तुकाराम मुंधे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट और खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।

एक तरफ अदालत के फैसले ने कारोबारियों के अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई की उचित अवधि पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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