नाला सफाई (सोर्स: सोशल मीडिया)  
पुणे

पुणे मनपा की मानसून पूर्व तैयारियों की खुली पोल, कागजों पर हुई सफाई; निरीक्षण में 10% चैंबर गाद से भरे मिले

Waterlogging Pune: पुणे मनपा की मानसून पूर्व सफाई की दूसरी डेडलाइन भी फेल। अतिरिक्त आयुक्त प्रणित नायर के निरीक्षण में खुला भ्रष्टाचार; कागजों पर सफाई दिखा कर गाद से भरे छोड़े 10% चैंबर।

रूपम सिंह

Pune PMC Monsoon Preparedness: मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर पुणे महानगरपालिका के दावे एक बार फिर खोखले साबित हुए हैं। 31 मई के बाद 15 जून की बढ़ाई गई दूसरी डेडलाइन भी खत्म हो गई, लेकिन नाले, स्टॉर्म वॉटर लाइन और चैंबरों की सफाई का काम अब तक पूरा नहीं हो सका। मनपा की रिपोर्ट के अनुसार करीब 20 हजार मीटर नालों, 46 हजार मीटर जल वाहिनियों और 9 हजार से अधिक चैंबरों की सफाई अधूरी है। इतना ही नहीं, अधिकारियों के निरीक्षण में कई स्थानों पर कागजों में सफाई पूरी दिखाने के बावजूद चैंबर गाद से भरे मिले, जिससे प्रशासनिक लापरवाही उजागर हो गई है।

अतिरिक्त आयुक्त ने किया निरीक्षण

स्थिति तब और चौंकाने वाली हो गई जब अतिरिक्त आयुक्त प्रणित नायर ने स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में जाकर सफाई कार्यों का निरीक्षण किया। अब तक करीब 700 स्टॉर्म वॉटर चैंबरों की जांच की गई है। इनमें लगभग 10 प्रतिशत चैंबर ऐसे पाए गए, जिनमें गाद निकाली ही नहीं गई थी, जबकि कागजों में सफाई पूरी दिखा दी गई थी।

हर मानसून जलभराव का करना पड़ता है सामना

इस खुलासे के बाद संबंधित विभागों को दोबारा सफाई करने के निर्देश देने पड़े हैं। पिछले कई वर्षों से अधिकारी फील्ड जांच के बजाय ठेकेदारों और विभागीय रिपोटों के आधार पर काम पूरा होने का दावा करते रहे हैं। नतीजतन हर मानसून में शहर के कई हिस्सों में जलभराव, यातायात बाधित होने और नागरिको को भारी परेशानी झेलने की घटनाएं सामने आती रही है। इस बार प्रत्यक्ष निरीक्षण में व्यवस्था की वास्तविकता उजागर हो गई है।

बिबवेवाड़ी में नाला सफाई का काम 75% ही पूरा

महापालिका के आंकड़ों के अनुसार शहर में कुल 2 लाख 23 हजार 430 मीटर नालों में से 2 लाख 3 हजार 159 मीटर की सफाई की गई है। यानी करीब 20 हजार 101 मीटर नालों की सफाई अभी भी बाकी है। वहीं 159 महत्वपूर्ण कल्वर्ट में से 150 की सफाई पूरी हुई है, जबकि 9 कल्वर्ट अब भी साफ नहीं किए गए हैं। क्षेत्रवार स्थिति भी चिंताजनक है। शिवाजीनगर-घोले रोड, सिंहगढ़ रोड और धनकवडी-कात्रज-अंबेगांव क्षेत्रों में 96 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हुआ है, लेकिन बिबवेवाड़ी क्षेत्र में नाले सफाई का काम केवल 75 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। विश्रामबाग और कसबा क्षेत्र की प्रगति भी संतोषजनक नहीं मानी जा रही।

मनपा क्षेत्र के 9 हजार से अधिक चैंबरों की सफाई अब भी है अधूरी

स्टॉर्म वॉटर लाइन की सफाई की स्थिति तो और गंभीर है। पुणे शहर की कुल 2 लाख 39 हजार 566 मीटर जलवाहिनियों में से केवल 1 लाख 93 हजार 444 मीटर जलवाहिनियां अब भी की सफाई हुई है, यानी 46 हजार 122 मीटर साफ नहीं की गई है।

इसी प्रकार 60 हजार 301 स्टॉर्म वॉटर चैबरों में से 52 हजार 369 वैबर साफ किए गए हैं, जबकि 9 हजार से अधिक चैंबरों की सफाई अधूरी है। विश्रामबाग, कसबा और बिबवेवाड़ी क्षेत्रों में मिलाकर 20 हजार मीटर से अधिक जल वाहिनियों की सफाई बाकी है। ये वही इलाके हैं जहां हर वर्ष भारी बारिश के दौरान पानी भरने की शिकायतें सबसे ज्यादा सामने आती हैं।

शहर में 250 जलभराव वाले स्थान चिन्हित

संभावित संकट को देखते हुए पुणे मनपा ने शहर के 250 जलभराव प्रभावित स्थानों में से 120 स्थानों पर तात्कालिक उपाय योजनाएं शुरू की है। इनमें 44 स्थानों का काम पूरा हो चुका है, 42 स्थानों पर कार्य जारी है, जबकि शेष 34 स्थानों पर अगले दो सप्ताह में अस्थायी उपाय किए जाने का दावा किया गया है।

साथ ही रात्रि पाली, क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी), पंप मशीनरी और 24 घंटे शिकायत निवारण केंद्र सक्रिय रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। हालांकि सवाल यही है कि जब मानसून दस्तक दे चुका है, तब भी यदि सफाई और जल निकासी व्यवस्था अधूरी है तो नागरिकों को संभावित जलभराव और अव्यवस्था से कौन बचाएगा?

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