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Pune News: पीएमसी आयुक्त का फटकार, मंजूरी के चक्कर में अटके पुणे के विकास कार्य

पुणे महानगर पालिका के कई सरकारी प्रोजेक्ट अधर में अटक गए है। बताया जा रहा है कि कुछ विभागों की दादागिरी और मनमानी रवैये ने विकास के कामों की रफ्तार को धीमा कर दिया है।

अपूर्वा नायक

Pune News In Hindi: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के कई महत्वपूर्ण नागरिक प्रकल्प सरकारी विभागों की अड़चनों के कारण अधर में लटक गए हैं। इन विभागों की दादागिरी और मनमानी रवैये से विकास कार्यों की गति थम गई है।

सोमवार को आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में महानगर पालिका आयुक्त नवल किशोर राम ने इस पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की और स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को इसको लिखित शिकायत को जाएगी। बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार सिंचाई विभाग, पुलिस प्रशासन, कृषि, वन और रक्षा विभाग सहित कई सरकारी संस्थाओं की अनुमति संबंधी अड़चनों से परियोजनाएं अटकी पड़ी हैं।

किसी भी विकास कार्य के लिए मंजूरी मिलने के बाद भी छोटे-छोटे मसलों को हल करने में महीनों लगते हैं। इससे प्रकल्पों की लागत बढ़ रही है और शहर के नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं से बंचित रहना पड रहा है।

आयुक्त ने कहा, 'नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना महानगर पालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार के विभाग ही अड़गे डालते हैं। इस बारे में हम राज्य सरकार को शिकायत करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि विभागों की यह दादागिरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी अड़चनों की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी जाएगी। बैठक में 24x7 पानी आपूर्ति परियोजना की समीक्षा की गई। राम ने बताया कि मीटर लगाने को लेकर नागरिकों की आपत्तियों को दूर करने के लिए संवाद जारी है और कार्य को गति दी जा रही है। मार्च 2026 तक लक्ष्य रखा गया है।

इस परियोजना से नागरिकों को समान और सतत जलापूर्ति सुनिश्चित होगी। जायका कंपनी के सहयोग से चल रही नदी सुधार योजना के अंतर्गत कुल 11 एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से 5 एसटीपी जनवरी 2026 तक और 4 एसटीपी मार्च 2026 तक तैयार हो जाएंगे। हालांकि, 2 एसटीपी भूमि अधिग्रहण की समस्याओं के कारण विलंबित होंगे।

विभागों की मनमानी से बढ़ी परेशानी

आयुक्त ने बताया कि कई विभाग विकास कार्यों के लिए पहले ही फिक्स शुल्क भरने की शर्त रखते हैं। उदाहरण के तौर पर समान पानी आधुति योजना के अंतर्गत जलवाहिनी डालने का कार्य जलसंपदा विभाग ने रोका हुआ है। विभाग का कहना है कि महापलिका पहले 10 करोड़ रुपये शुल्क के रूप में जमा करे, तभी अनुमति दी जाएगी, इस तरह की बाधाओं से प्रकाय वर्षी एक लटकते रहते है।

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