पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय (फोटो-सोशल मीडिया) 
पुणे

पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय की ‘संवाद’ पहल असरदार, 10 बालमित्र कक्षों से बाल अपराधों में आई भारी गिरावट

Pimpri News: पिंपरी-चिंचवड़ में 'संवाद' अभियान और 'बालमित्र कक्ष' से बाल अपराधों में कमी आई है। जनवरी 2025 के 69 मामलों के मुकाबले जनवरी 2026 में केवल 32 मामले दर्ज हुए। पुलिस की प्रभावी काउंसलिंग।

रूपम सिंह

Pimpri Chinchwad Police: पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत कार्यरत 'विशेष बाल पुलिस इकाई' द्वारा पिछले दो वर्षों में चलाए गए विभिन्न प्रतिबंधात्मक और पुनर्वासात्मक कार्यक्रमों का बाल अपराध पर सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। विभिन्न मामलों में बच्चों की व्यक्तिगत काउंसलिंग, अभिभावकों से सीधा संवाद, पारिवारिक व शैक्षणिक पृष्ठभूमि की जांच तथा शिक्षा और रोजगारोन्मुख मार्गदर्शन जैसी पहलों के माध्यम से नाबालिगों में पनपती अपराध प्रवृत्ति को नियंत्रित करने का ठोस प्रयास किया जा रहा है, पुलिस प्रशासन का मानना है कि समय रहते किए गए इन हस्तक्षेपों से अपराध की ओर झुकने वाले बच्चों को सही दिशा देने में बड़ी सफलता मिली है।

शहर में स्थापित हुए 10 बालमित्र कक्ष

  • पीड़ित और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शहर में 10 अत्याधुनिक 'बालमित्र कक्ष' स्थापित किए गए हैं। इन कक्षों में बच्चों से संवेदनशील, भयमुक्त और सम्मानजनक वातावरण में पूछताछ की जाती है।
  • अनुकूल फर्नीचर, पृथक बैठक व्यवस्था और प्रशिक्षित अधिकारियों के माध्यम से बच्चों के मानसिक तनाव को कम करने का प्रयास किया जाता है।
  • इसके साथ ही इन केंद्रों पर बाल अधिकारों, साइबर सुरक्षा और सोशल मीडिया के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ उनके पुनर्वास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

नाबालिगों की अपराध संलिप्तता में आई भारी कमी

  • आंकड़ों का विश्लेषण करें तो जनवरी 2026 में 32 नाबालिगों की अपराध में संलिप्तता दर्ज की गई। जबकि जनवरी 2025 में यह संख्या 69 थी। इस प्रकार जनवरी माह के तुलनात्मक आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी देखी गई है।
  • वर्ष 2025 में बालकों से संबंधित कुल 42 अपराध दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 67 थी।
  • इन अपराधों में मुख्य रूप से चोरी, नकबजनी, लूटपाट और मारपीट जैसी घटनाएं शामिल थीं, जिनमे अब गिरावट आई है।
  • सहायक पुलिस आयुक्त (नोडल अधिकारी) डॉ. विशाल हिरे ने बताया कि बच्चों में बढ़ती आक्रामकता, नशे की लत, मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रभाव अपराध की मुख्य वजह बन रहे है।
  • ऐसे बच्चों का समय पर मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कर उन्हें उचित परामर्श देना अनिवार्य है।

काउंसलिंग के साथ ही 245 संदिग्ध मामलों की निगरानी

'संवाद' अभियान के अंतर्गत वर्तमान में 245 संदिग्ध मामलों की निगरानी की जा रही है। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से बच्चों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा रहा है। आर्थिक तंगी, अवसाद, नैतिक मूल्यों का अभाव और पारिवारिक कलह बाल अपराध के पीछे प्रमुख कारण हैं। नियमित काउंसलिंग, आवश्यकतानुसार चिकित्सीय उपचार, ध्यान-योग और जीवन कौशल प्रशिक्षण संचालित किए जा रहे है।

व्यापक जन-जागरूकता अभियान

बाल अधिकारों और पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस थानों की भूमिका को लेकर वर्तमान में एक विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों, औद्योगिक क्षेत्रों और बस्तियों में बैठकें आयोजित कर छात्रों को अपराध से दूर रहने का मार्गदर्शन दिया जा रहा है। पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे के मार्गदर्शन और सहायक पुलिस आयुक्त डॉ. विशाल हिरे के नेतृत्व में 'संवाद' नामक विशेष अभियान सक्रिय है। इस पहल के तहत पुलिस टीमें विभिन्न क्षेत्रों में जाकर सीधे बच्चों और उनके अभिभावकों से संवाद स्थापित करती हैं।

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