Pune River Pollution: पुणे शहर की बड़ी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाना अनिवार्य है, लेकिन पुणे महानगरपालिका (PMC) के पास इन प्लांटों की वास्तविक स्थिति का कोई स्पष्ट और केंद्रीकृत रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। मनपा के सीवरेज विभाग ने अब तक 772 निजी संपत्तियों और इमारतों को एसटीपी स्थापित करने के लिए एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जारी की है। हालांकि, इनमें से कितने एसटीपी वर्तमान में चालू हैं, कितने बंद पड़े हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर क्या कार्रवाई हुई, इसका एकीकृत आंकड़ा मनपा मुख्यालय में उपलब्ध ही नहीं है। इस लापरवाही से नदी प्रदूषण रोकने की मनपा की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नगरसेवक दिनेश मथवाड़ ने मनपा प्रशासन से शहर में एसटीपी वाली सोसायटियों की संख्या, प्रभागवार चालू-बंद प्लांटों का ब्योरा और नियमों का उल्लंघन करने वाली सोसायटियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण मांगा था। इसके जवाब में सीवरेज विभाग ने केवल यह बताया कि 772 संपत्तियों को एनओसी दी गई है, लेकिन चालू प्लांटों की वास्तविक संख्या बताने में असमर्थ रहा। प्रशासन का कहना है कि यह जानकारी संबंधित 16 क्षेत्रीय (वार्ड) कार्यालयों के पास उपलब्ध हो सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मनपा मुख्यालय के पास केंद्रीकृत डेटा ही नहीं है, तो प्रशासन इन प्लांटों की नियमित निगरानी किस आधार पर कर रहा है?
यूडीसीपीआर-2020 (UDCPR-2020) के नियमों के तहत 100 या उससे अधिक फ्लैट वाली सोसायटियों में एसटीपी की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। कई सोसायटियों में बिजली और रखरखाव का खर्च अधिक होने के कारण एसटीपी बंद रखने की शिकायतें आती रहती हैं। जब एसटीपी बंद रहता है, तो बिना उपचारित किया गया सीवेज सीधे नालों और नदियों में बहता है। केवल एनओसी जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एसटीपी के नियमित संचालन, उपचारित पानी की गुणवत्ता और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना पुणे महानगरपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
पुणे शहर में नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने और सीवेज ट्रीटमेंट के लिए हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। इसके बावजूद निजी सोसायटियों के 772 एसटीपी की चालू या बंद स्थिति का रिकॉर्ड न होना मनपा की कार्यप्रणाली पर बड़ा धब्बा है। विशेषज्ञों और नागरिकों की मांग है कि मनपा प्रशासन को केवल एनओसी की संख्या बताने के बजाय सभी 772 एसटीपी का निरीक्षण कर चालू-बंद स्थिति, जारी नोटिसों और जुर्माने का पारदर्शी व अद्यतन केंद्रीकृत रिकॉर्ड जनता के सामने लाना चाहिए।