

PMC Property Tax: पुणे महानगरपालिका (PMC) में संपत्ति कर (Property Tax) की करोड़ों रुपये की बकाया राशि को राइट-ऑफ करने के अधिकार को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन द्वारा स्थायी समिति के समक्ष रखे गए एक नए प्रस्ताव पर विपक्षी नेता एडवोकेट नीलेश निकम ने तीखा हमला बोला है। निकम का सीधा आरोप है कि इस प्रस्ताव के जरिए अधिकारी वर्ग लोकप्रतिनिधियों और स्थायी समिति के अधिकारों को छीनकर करोड़ों रुपये का वित्तीय निर्णय अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा है।
विवाद की मुख्य वजह स्थायी समिति की बैठक में विषय क्रमांक 1141 के तहत पेश किया गया प्रस्ताव है। इसमें महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 485 के तहत बिलों और रिकॉर्ड में स्पेलिंग व टंकण संबंधी गलतियों को सुधारने और धारा 152 के तहत 'असूली योग्य' (Non-recoverable) बकाया राशि को राइट-ऑफ करने की प्रक्रिया तय करने की बात कही गई है।
एड. नीलेश निकम का तर्क है कि क्लैरिकल गलतियां सुधारने का अधिकार पहले से प्रशासन के पास है, लेकिन धारा 152 के तहत करोड़ों की बकाया राशि को माफ या राइट-ऑफ करने का अंतिम अधिकार केवल चुनी हुई स्थायी समिति के पास है। नए प्रस्ताव के तहत हर मामले को समिति के सामने लाने के बजाय केवल एक 'समेकित रिपोर्ट' अवलोकन के लिए रखने की योजना बनाई गई है, जो सीधे तौर पर पारदर्शिता को खत्म करने का प्रयास है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए निकम ने 14 मई 2013 के उस फैसले की याद दिलाई, जिसमें तत्कालीन व्यवस्था के तहत आयुक्त (₹25 लाख से अधिक), अतिरिक्त आयुक्त (₹10 से ₹25 लाख) और कर प्रमुख (₹10 लाख तक) को सीमित अधिकार दिए गए थे। निकम ने आरोप लगाया कि पूर्व में महापालिका के कंप्यूटर विभाग से हार्ड डिस्क गायब होने की घटना के बाद अब बिना किसी स्पष्ट आंकड़े के यह अधिकार मांगना बेहद संदिग्ध है।
ना बकाया का आंकड़ा, ना संपत्तियों की संख्या
विपक्ष का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कितनी रकम और कितनी संपत्तियों का कर राइट-ऑफ किया जाना है? निकम ने दावा किया कि जब संबंधित अधिकारियों से कुल बकाया का हिसाब मांगा गया, तो उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यह अधिकार अधिकारियों के पास चला गया, तो मिलीभगत के जरिए पुणे महानगरपालिका को भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने मांग की है कि जब तक पूरा पारदर्शी हिसाब नहीं दिया जाता, तब तक इस प्रस्ताव को खारिज किया जाए।