Pune Municipal Corporation Ward Committees: पुणे महानगरपालिका (मनपा) की प्रभाग समितियों को अब अपने कार्यक्षेत्र में 25 लाख रुपये तक की विभिन्न प्रकार की निविदाओं को मंजूरी देने का अधिकार मिलेगा, मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने इस संबंध में प्रस्ताव रखा था, जिसे मंजूरी दे दी गई है।
अब तक प्रभाग समितियों के पास पांच लाख रुपये तक की आर्थिक सीमा थी। इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया गया है। इससे प्रभाग स्तर पर होने वाले छोटे और आवश्यक विकास कार्यों को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने कहा कि शहर के विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया गया है। हालांकि, 25 लाख रुपये तक निविदा मंजूरी का अधिकार प्रभाग समितियों को देने से बड़ी राशि के कामों की छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर मंजूरी लेने की संभावना और स्थायी समिति के अधिकारों पर असर को लेकर सवाल उठ सकते है। इस पर भिमाले ने कहा कि शहर के विकास को गति देना इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य है।
पुणे मनपा का क्षेत्रफल करीब 527 वर्ग किलोमीटर है। शहर के लगातार विस्तार और बढ़ती आबादी के कारण सड़क, स्वच्छता, जलापूर्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों का दबाव भी बढ़ रहा है।
ऐसे में स्थानीय स्तर के विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए प्रशासन ने अधिकारों के विकेंद्रीकरण का प्रस्ताव रखा।
जनवरी 2026 में मनपा की आम चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रभाग समितियों का गठन किया गया। इन समितियों की हर महीने बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
अधिनियम की धारा 29-अ के तहत प्रभाग समितियों को विभिन्न वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हैं।
नए प्रस्ताव के अनुसार 25 लाख रुपये तक के कार्यों को तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरी देने के अधिकार जिन अधिकारियों के पास वर्तमान में हैं, वे यथावत रहेंगे
हालांकि, 25 लाख रुपये तक की सभी प्रकार की निविदाओं को मंजूरी देने का अधिकार संबंधित क्षेत्र को प्रभाग समिति को दिया जाएगा।
प्रभाग समितियों को निविदा मंजूरी का अधिकार मिलने के साथ ही निर्धारित समय सीमा में निविदाओं पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी भी संबंधित समिति की होगी,
महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की बारा 73 (क) के तहत निर्धारित अवधि में निविदा मंजूर करना आवश्यक होगा।
इसके अलावा निविदा को मंजूरी देते समय संबंधित कार्य के लिए मनपा के स्वीकृत बजट में उपलब्ध प्रावधान का ध्यान रखना अनिवार्य होगा।
इससे वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी भी प्रभाग समितियों पर रहेगी।
अधिकारों के इस विकेंद्रीकरण से प्रभाग स्तर पर छोटे विकास कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी और निविदा प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
हालांकि, निविदाओं के विभाजन और अधिकारों के दुरुपयोग की आशंका को रोकने के लिए प्रक्रिया की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।