Pune Municipal Corporation Development Fund: पुणे महानगरपालिका की आमसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) के नगरसेवक अमोल बालवडकर की विकास निधि को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। प्रभाग क्रमांक 9 ‘ड’ के लिए मंजूर करीब 15 करोड़ रुपये की विकास निधि को अब शून्य कर दिया गया है। भाजपा नगरसेवकों की ओर से बालवडकर के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, जिसे आमसभा में बहुमत से मंजूरी मिल गई।
बताया जा रहा है कि बालवडकर ने भाजपा नेता और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील के कोथरूड विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों के ऑडिट की मांग की थी। इसके बाद उनके प्रभाग की विकास निधि को लेकर विवाद सामने आया। बालवडकर का आरोप है कि ऑडिट की मांग करने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और उनका फंड वापस ले लिया गया।
बालवडकर की मांग के बाद संबंधित विकास कार्यों में पुणे महानगरपालिका की निधि का इस्तेमाल नहीं होने का हवाला दिया गया। इसी आधार पर उनकी ऑडिट संबंधी मांग को दफ्तरी दाखिल कर दिया गया। इसके कुछ ही दिनों बाद उनके प्रभाग के लिए निर्धारित विकास निधि को दूसरे कार्यों की ओर डायवर्ट कर दिया गया।
बालवडकर के अनुसार, शुरुआत में उनके बजट के सामने विकास निधि के तौर पर शून्य दर्ज किया गया था। इस पर उन्होंने आपत्ति जताई, जिसके बाद उनके प्रभाग के लिए विकास निधि आवंटित की गई। अब आमसभा के फैसले के बाद यह निधि दोबारा शून्य कर दी गई है।
विकास निधि को लेकर हुए इस घटनाक्रम ने महायुति के भीतर राजनीतिक खींचतान को सामने ला दिया है। एक तरफ बालवडकर ने ऑडिट की मांग को लेकर कार्रवाई का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर भाजपा नगरसेवकों ने प्रस्ताव लाकर उनकी निधि को समाप्त कर दिया। अब इस मुद्दे को लेकर पुणे की स्थानीय राजनीति में विवाद बढ़ने के संकेत हैं।