पुणे महानगर पालिका (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)  
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Pune Waste Management: पुणे मनपा में 4,500 सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रस्ताव पर बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

Pune Waste Management: पुणे मनपा में 4,500 ठेका सफाई कर्मचारियों की भर्ती पर जमकर हंगामा। फर्जी आंकड़ों और अवैध उगाही के आरोपों के बाद महापौर ने लिखित आपत्तियां मांगीं।

रूपम सिंह

Pune Municipal Corporation Meeting Waste Management Controversy: पुणे महानगर पालिका की बुधवार को हुई जनरल बॉडी मीटिंग में ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली और अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव विवादों में घिर गया। ठोस कचरा व्यवस्थापन विभाग द्वारा प्रायोगिक आधार पर ठेका पद्धति से हजारों नए कर्मचारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव का सत्ता पक्ष और विपक्ष के नगरसेवकों ने विरोध किया। विपक्ष ने विभाग की कार्यप्रणाली, आंकड़ों की पारदर्शिता और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए। विरोध बढ़ने पर महापौर मंजुषा नागपुरे ने सदस्यों से लिखित आपत्तियां और सुझाव देने के निर्देश दिए।

प्रस्ताव पेशः ठेका पद्धति पर नियुक्त किए जाएंगे कर्मचारी

प्रशासन की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव के मुताबिक, शहर में लगातार बढ़ रही नई सड़कों की लंबाई का हवाला देते हुए सड़क सफाई और कचरा संकलन के वास्ते लगभग साढ़े 4 हजार अतिरिक्त कर्मचारियों की ठेका पद्धति पर नियुक्ति की योजना है।

इसे फिलहाल प्रारंभिक तौर पर प्रायोगिक आधार पर लागू किया जाना था।हालांकि इस प्रस्ताव को पूर्व में स्थायी समिति की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन जनरल बॉडी में इसका चौतरफा विरोध देखने को मिला, जिससे मनपा की राजनीति गरमा गई है।

विपक्ष ने व्यवस्था की लाचारी पर सवाल उठाए

चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। शिवसेना के गटनेता नितिन गावडे ने क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए कर्मचारियों के आवंटन में भारी असमानता का आरोप लगाया वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता काका चव्हाण ने सिंहगढ़ रोड क्षेत्र का हवाला देते हुए ठेकेदारों द्वारा कचरा उठाने में बरती जा रही अनियमितताओं और व्यवस्था की लाचारी पर सवाल उठाए।

ठेकेदारों को ही हो रहा लाभ

कांग्रेस के गटनेता चंदू कदम और नगरसेवक प्रशांत जगताप ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह प्रस्ताव व्यवस्था सुधारने के बजाय ठेकेदारों को आर्थिक लाभपहुंचाने के लिए है। सड़कों की लंबाई से जुड़े आंकड़ों में भारी फर्जीवाड़ा हुआ है।

रिकॉर्ड के अनुसार, शहर में सड़कों की वास्तविक लंबाई करीब 3 हजार किमी है, जबकि सफाई प्रस्ताव में इसका दायरा लगभग 7 हजार किमी दर्शाया गया है। विपक्ष के नेता निलेश निकम ने भी आंकड़े का विरोध किया है।

नियुक्ति के नाम पर की गई जरूरतमंदों से उगाही

अतिरिक्त आयुक्त प्रजित नायर ने सफाई योजना को स्पष्ट करने और स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन उनके तर्कों से सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। सभागृह नेता गणेश बिडकर ने दावा किया कि सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के नाम पर लोगों से 50 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई है, कई शिकायतें मिली हैं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पुणे मनपा में पहले से ही हजारों स्थायी और ठेका कर्मचारी काम कर रहे हैं, तो इस नई भर्ती की वास्तविक आवश्यकता क्या है। महापौर ने सभी सदस्यों को लिखित आपत्तियां सौंपने को कहा है।

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