Parth Pawar Mundhwa Land Scam: पुणे के चर्चित और करोड़ों रुपये के मुंढवा जमीन सौदे में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। हाईकोर्ट ने मुंढवा इलाके की करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन को बेहद कम कीमत में खरीदने के मामले में बड़ा सवाल खड़ा किया है। अदालत ने अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी में 99 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले सांसद पार्थ पवार को आरोपी न बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि विवादित जमीन खरीदने वाली कंपनी अमेडिया एंटरप्राइजेज में पार्थ पवार के पास 99 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि महज 1 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले दिग्विजय पाटिल को पुलिस ने मामले में आरोपी बनाया है।
इस विरोधाभास पर जस्टिस माधव जामदार ने गहरी नाराजगी जताई और 7 सितंबर को महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया। कोर्ट ने DGP से पूछा कि इतने बड़े हिस्सेदार पार्थ पवार का नाम अब तक एफआईआर या आरोपियों की सूची में क्यों नहीं जोड़ा गया?
मामले की गंभीरता और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद महाराष्ट्र पुलिस हरकत में आ गई है। कोर्ट को सूचित किया गया है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने पुणे पुलिस को इस मामले की आगे की जांच पूरी तरह से विस्तृत और पेशेवर तरीके से करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए DGP खुद इस पूरे केस की प्रगति की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करेंगे।
बता दें कि यह मामला पुणे के मुंढवा इलाके में करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन की खरीद से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि पार्थ पवार की अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी ने यह जमीन वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी है। जमीन के सौदे में कथित अनियमितताओं को लेकर पुणे पुलिस जांच की रही है।
इस मामले की बॉम्बे हाईकोर्ट की मौजूदा सुनवाई पुणे के निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ी है। हाई कोर्ट ने सूर्यकांत येवले को अग्रिम जमानत दे दी। येवले को इस मामले में आरोपी बनाया गया। तहसीलदार सूर्यकांत येवले पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए जमीन के लेनदेन को आसान बनाया।
हालांकि, तहसीलदार सूर्यकांत येवले ने इन आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि जमीन के लेनदेन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।