हर्षदा देशमुख जाधव और जयंत पाटिल (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

MLC Election: पुणे और मराठवाड़ा में स्नातक चुनाव के नतीजों पर सियासत तेज, जयंत पाटिल ने सरकार पर उठाए सवाल

Maharashtra MLC Election Result: पुणे और मराठवाड़ा स्नातक चुनाव नतीजों को जयंत पाटिल ने परीक्षा संबंधी समस्याओं पर युवाओं की नाराजगी से जोड़ा। हर्षदा देशमुख जाधव ने रोजगार और MPSC सुधार का भरोसा दिया।

आलोक उमाकृष्ण

ेताHighlights

  • पुणे में हर्षदा देशमुख-जाधव ने दर्ज की जीत।

  • डॉ. प्रतापसिंह पाटिल ने निर्णायक बढ़त हासिल की।

  • जयंत पाटिल ने लोकसभा-विधानसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने की अपील की।

  • रोजगार, शिक्षा, MPSC पारदर्शिता और ‘स्मार्ट ग्रेजुएट’ कार्यक्रम पर जोर।

Jayant Patil On Youth Issues: पुणे और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों में बेरोजगारी, महंगाई और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर युवाओं की नाराजगी सामने आई है। पुणे विभाग में महाविकास आघाड़ी की हर्षदा देशमुख-जाधव ने जीत दर्ज की, जबकि मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में डॉ. प्रतापसिंह पाटिल ने निर्णायक बढ़त हासिल की।

इन नतीजों को सरकार की नीतियों के खिलाफ जनादेश बताते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि स्नातक मतदाताओं ने अपने मतों के जरिए मौजूदा व्यवस्था के प्रति असंतोष व्यक्त किया है। पाटिल ने कहा कि देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को होने वाली परेशानियों का असर चुनाव में दिखाई दिया है।

सरकार को इन नतीजों से मिले संकेतों को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुणे विभाग की नवनिर्वाचित विधायक हर्षदा देशमुख-जाधव शिक्षित और पार्टी के लिए काम करने वाली युवा कार्यकर्ता हैं। शरद पवार ने उन पर विश्वास जताते हुए एक नए चेहरे को अवसर दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ महाविकास आघाड़ी के घटक दलों के नेताओं और पदाधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से यह जीत संभव हुई।

मराठवाड़ा में भी डॉ. प्रतापसिंह पाटिल का अच्छा प्रदर्शन

मराठवाड़ा में भी डॉ. प्रतापसिंह पाटिल ने अच्छा प्रदर्शन किया। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों से स्पष्ट हुआ है कि मतदाता स्वतंत्र रूप से विचार कर अपना फैसला ले सकते हैं। पाटिल ने कहा कि विधानसभा चुनाव में महाविकास आघाड़ी की सीटें सीमित रहने के बावजूद स्नातक मतदाताओं ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से परे जाकर मतदान किया।

मतगणना में देरी पर प्रशासन का बचाव

मतगणना में 30 घंटे से अधिक समय लगने के सवाल पर राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि प्राथमिकता क्रम के आधार पर मतदान होने के कारण प्रक्रिया में अधिक समय लगता है। निर्धारित कोटा पूरा होने तक मतों की गिनती करनी पड़ती है, इसलिए देरी हुई।

हालांकि, उन्होंने प्रशासन के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन ने अच्छी तरह काम किया है और उसे दोष देना उचित नहीं होगा। पाटिल ने दावा किया कि बैलेट पेपर पर चुनाव होने के बाद विपक्षी उम्मीदवारों को मिली जीत ने इस व्यवस्था पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी बैलेट पेपर के जरिए कराने का निर्णय लेने की अपील की।

स्नातकों के मुद्दों पर काम करने का आश्वासन

नवनिर्वाचित विधायक हर्षदा देशमुख-जाधव ने कहा कि रोजगार, शिक्षा, महंगाई और महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) से जुड़े लंबित मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। युवाओं को उद्यमिता और स्टार्टअप शुरू करने के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने पांच जिलों के स्नातकों को अधिक सक्षम बनाने के लिए ‘स्मार्ट ग्रेजुएट’ कार्यक्रम शुरू करने पर विचार करने की बात भी कही। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, एमपीएससी की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट

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