Pune Ganesh Mandal Sound System: दही हांडी, गणेशोत्सव और विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर जारी असमंजस के बीच समाधान की दिशा में बातचीत आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। पुलिस प्रशासन और गणेश मंडलों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठकों में ‘चार बेस और चार टॉप’ की ध्वनि व्यवस्था पर सहमति बनती दिख रही है।
इन बैठकों में शहर के करीब 80 प्रतिशत गणेश मंडलों ने इस फॉर्मूले का समर्थन किया है। हालांकि, अंतिम नियमावली अभी तय होना बाकी है और शेष मंडलों के साथ भी चर्चा जारी है।
बैठकों के शुरुआती दौर में पुलिस प्रशासन ने गणेश मंडलों के सामने दो टॉप और दो बेस की ध्वनि व्यवस्था का विकल्प रखा था। मंडलों के प्रतिनिधियों ने उत्सव की परंपरा और जुलूस की जरूरतों को देखते हुए चार टॉप और चार बेस का विकल्प सुझाया।
पुलिस प्रशासन की ओर से इस प्रस्ताव पर चर्चा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि गणेशोत्सव और दही हांडी जैसे पारंपरिक उत्सव उत्साहपूर्ण माहौल में मनाए जाएं, लेकिन ध्वनि प्रदूषण के नियमों में पूरी छूट नहीं दी जा सकती। नागरिकों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अत्यधिक तेज आवाज वाली प्रणालियों पर नियंत्रण जरूरी है।
जुलूसों में कई बार बड़ी संख्या में बेस और टॉप स्पीकर्स लगाए जाने को लेकर विवाद होता रहा है। प्रस्तावित 4 बेस-4 टॉप फॉर्मूले में एक DJ ट्रॉली या साउंड सेटअप में अधिकतम चार बड़े बेस स्पीकर्स यानी सब-वूफर्स और चार टॉप स्पीकर्स रखने की बात है। इसका उद्देश्य बड़े साउंड सेटअप और अत्यधिक तेज आवाज पर नियंत्रण रखना है।
पुणे पुलिस के अनुसार प्लाज्मा और प्रेशर मोड जैसे उपकरणों पर रोक जारी रखने की तैयारी है। इन उपकरणों से अत्यधिक तीव्र आवाज पैदा होने की बात कही गई है।
पुणे शहर साउंड एंड इलेक्ट्रिकल जनरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष बबलू रमजानी के अनुसार, आगामी गणेशोत्सव और दही हांडी उत्सव में साउंड व्यवसायी पुलिस आयुक्त द्वारा तय नियमों का पालन करेंगे। उनके अनुसार जुलूस में केवल चार बेस और चार टॉप साउंड सिस्टम की अनुमति होगी तथा लेजर, प्रेशर और प्लाज्मा लाइट्स का इस्तेमाल बंद रखा जाएगा।
चार टॉप और चार बेस की व्यवस्था को लेकर करीब 80 प्रतिशत मंडलों की सहमति मिलने के बाद अब बाकी मंडलों के साथ भी चर्चा की जा रही है। पुलिस और गणेश मंडलों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बैठकों के बाद अंतिम नियमावली तय होने की संभावना है।
गणेशोत्सव शुरू होने से पहले डीजे और साउंड व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नियम जारी किए जा सकते हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि स्पष्ट व्यवस्था बनने से गणेश मंडलों और पुलिस के बीच होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।