Palghar Child Drowning In Lake: महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां वसई पूर्व के गवरीपाड़ा इलाके में एक 4 वर्षीय बालक की झील में डूबने से मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक बालक की पहचान विवेक शुक्ला के रूप में हुई है, जो सोमवार की सुबह अपनी जान गंवा बैठा।
विवेक शुक्ला अपने माता-पिता के साथ गवरीपाड़ा के हनुमान मंदिर के पास जीवन नगर इलाके में रहता था। जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 11:00 बजे जब वह अपने घर के पास खेल रहा था, तभी वह खेलते-खेलते पास ही स्थित तुलसीमाता झील (Tulshimama Lake) की ओर चला गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झील के किनारे खेलते समय मासूम का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा। हादसे के बाद इलाके में शोर मच गया, जिसे सुनकर स्थानीय निवासी तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद विवेक को पानी से बाहर निकाला और आनन-फानन में वसई-विरार शहर नगर निगम (VVMC) अस्पताल ले गए। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, फेफड़ों और नाक में पानी भर जाने के कारण बच्चे की मौत हुई। वालीव पुलिस ने इस मामले में दुर्घटनावश मृत्यु (Accidental Death) का मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
इस घटना ने स्थानीय निवासियों के बीच भारी गुस्से को जन्म दिया है। नागरिकों का आरोप है कि इलाके के जलाशयों के पास न तो कोई सुरक्षात्मक फेंसिंग (बाड़) लगाई गई है और न ही सुरक्षा जाल का कोई प्रबंध है। लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सुरक्षा के अभाव में किसी मासूम ने अपनी जान गंवाई है। निवासियों ने प्रशासन से तत्काल स्थानीय जल निकायों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को टाला जा सके।
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यह घटना 26 नवंबर 2025 को विरार पूर्व के फूलपाड़ा इलाके में हुई एक समान त्रासदी की याद दिलाती है। उस समय एक वसई विरार नगर निगम की झील में 11 वर्षीय लड़के की डूबने से मौत हो गई थी। चौंकाने वाली बात यह थी कि उस समय झील पर लगा सुरक्षा जाल खेलते समय टूट गया था, जिससे वह लड़का पानी में गिर गया था। बार-बार होने वाली ये घटनाएं दर्शाती हैं कि प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितना लापरवाह है। पालघर में ही एक अन्य घटना में विरार पूर्व में पत्थर की खदान में भरे पानी में डूबने से एक पिता और उनकी किशोर बेटी की भी मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों ने अब पालघर के निवासियों को सड़कों पर उतरने और प्रशासन से जवाबदेही तय करने के लिए मजबूर कर दिया है।