

Narendra Modi Achievements: आज पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 सालों के सफर की चर्चा हो रही है। आज इस बड़ी उपलब्धि को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनसेवा के दौरान हासिल की गयी 25 ऐतिहासिक उपलब्धियों को हम बताने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर देश को गर्व होगा। नरेंद्र मोदी अपनी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता के आधार पर आज भी लोकप्रिय बने हुए हैं।
वैश्विक कूटनीति में भारत को 'विश्वबंधु' के रूप में स्थापित करते हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और रिफॉर्म रोडमैप पर सर्वसम्मति बनी।
भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराया और अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलकर स्वदेशी रॉकेट तथा मानवयुक्त 'गगनयान' मिशन की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
चीन व ताइवान पर निर्भरता कम करने के लिए देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और असेंबली प्लांट्स का निर्माण शुरू कर भारत को तकनीक का नया वैश्विक केंद्र बनाया गया।
आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने संवेदनशील सैन्य ऑपरेशन 'ऑपरेशन सिंदूर' को सफलतापूर्वक अंजाम देकर दुश्मन को पस्त किया।
विश्वव्यापी मंदी और युद्ध संकट के बावजूद कुशल आर्थिक प्रबंधन के दम पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की शानदार जीडीपी विकास दर हासिल की।
काला धन, फर्जी नोटों और आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए नोटबंदी का फैसला लिया गया, जिससे देश में डिजिटल इकोनॉमी और ट्रांजेक्शन को भारी बढ़ावा मिला।
28 सितंबर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक और 26 फरवरी 2019 को एयर स्ट्राइक कर भारत ने पहली बार गैर-युद्ध स्थिति में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर आतंकियों के ठिकानों को तबाह किया।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त किया गया, जिससे सभी केंद्रीय कानून लागू हुए और क्षेत्र में शांति व पर्यटन की बहाली हुई।
तीन तलाक की कुप्रथा के खिलाफ कड़ा कानून बनाकर इसे गैरकानूनी घोषित किया गया और 2018 में हज पर दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी को समाप्त किया गया।
पूरे देश में कर विसंगतियों को दूर करने के लिए 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू किया गया, जिससे टैक्स कलेक्शन और व्यापारिक पारदर्शिता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए पीड़ित अल्पसंख्यक शरणार्थियों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई) को आसानी से नागरिकता देने के लिए सीएए लागू किया गया।
सदियों के संघर्ष के बाद 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई और 25 नवंबर 2025 को मुख्य शिखर पर भव्य धर्मध्वज फहराया गया।
महामारी के दौरान रिकॉर्ड समय में स्वदेशी वैक्सीन तैयार कर देशवासियों को 200 करोड़ से अधिक मुफ्त डोज दी गईं और विश्व के 98 देशों को भी वैक्सीन भेजी गई।
काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, सोमनाथ और उज्जैन महाकाल लोक जैसे देश के प्राचीन और पवित्र तीर्थ स्थलों का कायाकल्प कर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया गया।
बीते वर्षों में भारत के फार्मा निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि हुई, जिससे वैश्विक बाजार में गुणवत्तापूर्ण और सस्ती दवाइयों की प्रचुर उपलब्धता सुनिश्चित हुई।
दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू कर 50 करोड़ से अधिक नागरिकों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का सुरक्षा कवच दिया गया।
गुलामी के प्रतीक 'राजपथ' का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' किया गया और जॉर्ज पंचम की मूर्ति हटाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई।
सीएम रहते हुए साल 2000 से 2010 के दौरान गुजरात की आर्थिक विकास दर (GSDP) को 9.8 प्रतिशत पहुंचाया, जो देश की औसत 7.7 प्रतिशत दर से काफी आगे थी।
साल 2003 में 'वाइब्रेंट गुजरात' की शुरुआत कर देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित किया, जो 2011 तक 21 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश प्रस्तावों में बदल गया।
साल 2008 में जब बंगाल में नैनो प्रोजेक्ट का विरोध हुआ, तब कुछ ही दिनों में प्रक्रियाओं को सुगम बनाकर टाटा नैनो प्लांट को गुजरात में स्थापित कराकर नया औद्योगिक अवसर बनाया।
2005-06 में गुजरात में दर्ज हुई 15% की अभूतपूर्व विकास दर और दूरदर्शी आर्थिक फैसलों को दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों ने 'मोदीनॉमिक्स' का नाम दिया।
बीटी कॉटन, चेक डैम, माइक्रो-इरीगेशन और नई तकनीकों के प्रयोग से गुजरात की खाद्यान्न उपज में 100% और कपास में 200% का इजाफा कर राज्य को 'फूड सरप्लस' बनाया।
बिजली उत्पादन क्षमता को 9,000 मेगावाट से बढ़ाकर 23,887 मेगावाट किया गया और ट्रांसमिशन घाटे को 35% से घटाकर 15% कर राज्य को पावर सरप्लस बनाया।
गांवों को सड़कों से जोड़ने के 3,000 रूरल प्रोजेक्ट्स पूरे किए गए और पोर्ट-टू-पोर्ट कनेक्टिविटी व अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प किया गया।
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'कन्या केलवणी' योजना, शाला प्रवेशोत्सव, लिंगानुपात में सुधार और स्कूलों में शौचालयों के निर्माण जैसी दूरदर्शी पहल की गईं।