Palghar Illegal Dhaba Demolition: मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-48 के किनारे फैले अवैध होटल, ढाबे, टायर-पंक्चर की दुकानें, चाय की टपरियां और अन्य व्यावसायिक अतिक्रमण अब प्रशासन के निशाने पर हैं। सड़क के डिवाइडर, राजमार्ग की सीमा और वन क्षेत्र में अवैध रूप से मलबा डालने वालों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है।
पालघर के वन मंत्री एवं पालकमंत्री गणेश नाईक के निर्देश के बाद संबंधित विभागों ने अतिक्रमणों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई तेज कर दी है। जिला नियोजन समिति की बैठक में पालकमंत्री गणेश नाईक ने एनएच-48 से लगे अतिक्रमणों का जायजा लेते हुए संबंधित विभागों को नियमानुसार कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
अब जिलाधिकारी डॉ. इंदू रानी जाखड़ के मार्गदर्शन में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के समन्वय से कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है।
वन विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में एनएच-48 के आसपास कुल 114 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इन अतिक्रमणों का कुल 73,831 वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र दर्ज किया गया है। इसमें ढाबे और उपाहारगृह, दुकानें एवं व्यावसायिक निर्माण, वाहन पार्किंग, पंक्चर की दुकानें और चाय की टपरियां शामिल हैं।
प्रशासन ने सभी अतिक्रमणों को संबंधित जमीन की कानूनी स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया है। एनएचएआई और वन विभाग अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में नियमानुसार कार्रवाई कर रहे हैं। आरक्षित एवं संरक्षित वन क्षेत्र में मौजूद अतिक्रमणों को लेकर संबंधित लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
22 से 30 जुलाई 2026 के बीच एनएचएआई की ओर से कुल 80 अतिक्रमित संपत्तियों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया गया। संबंधित अतिक्रमणों को हटाने के लिए पुलिस प्रशासन और वसई-विरार शहर महानगरपालिका (वीवीएमसी) के सहयोग से कार्रवाई भी की गई है।
प्रशासन अब एनएच-48 के किनारे नए अतिक्रमण रोकने के साथ ही सड़क के डिवाइडर, राजमार्ग की सीमा और वन क्षेत्र में अवैध रूप से डेब्रिज डालने वालों पर भी नजर रखेगा। इसके लिए नियमित निगरानी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आने वाले दिनों में एनएचएआई, वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के संयुक्त समन्वय से चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य एनएच-48 पर सुरक्षित एवं सुचारु यातायात सुनिश्चित करना, सरकारी एवं वन भूमि की रक्षा करना और भविष्य में होने वाले अतिक्रमणों पर पूरी तरह रोक लगाना है।