Nashik Pilgrimage Development Plan ( Source: Social Media ) 
नासिक

विकास की वेदी पर 'इतिहास' की बलि ! त्र्यंबकेश्वर में कुंभ से पहले बड़ा बदलाव

Trimbakeshwar Kumbh Mela: त्र्यंबकेश्वर में कुंभ तैयारी के तहत ‘दर्शन पथ’ के लिए 46 साल पुरानी शिवनेरी इमारत हटाई गई, 275 करोड़ के विकास प्लान को मिली रफ्तार।

अंकिता पटेल

Nashik Pilgrimage Development Plan: त्र्यंबकेश्वर में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर शहर के कायाकल्प की प्रक्रिया तेज हो गई है। पिछले 5 दशकों (46 वर्षों) से कई ऐतिहासिक घटनाओं की गवाह रही 'शिवनेरी' इमारत को बहाने का काम शुरू कर दिया गया है।

प्रशासन ने यह कड़ा कदम 275 करोड़ रुपये के तीर्थक्षेत्र विकास प्रारूप (मास्टर प्लान) के तहत महत्वाकांक्षी 'दर्शन पथ' परियोजना के लिए उठाया है। 68 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस दर्शन पथ का मार्ग प्रशस्त करने के लिए शिवनेरी धर्मशाला का अस्तित्व अब समाप्त हो गया है।

1978 में रखी गई थी नींव

शिवनेरी इमारत का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है, जो अब यादों में सिमट गया है इस इमारत की नींव 1978 में रखी गई थी और 1980 में इसका निर्माण पूरा हुआ था। साल 1988 में तत्कालीन - नगर अध्यक्ष द्वारा भक्तों की सेवा के लिए इसका नाम 'शिवनेरी' रखा गया था। यह इमारत लंबे समय तक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, ट्रेजरी कार्यालय और कई निजी व्यवसायों का मुख्य आधार रही।

पुलिस बंदोबस्त तैनात रहा

प्रांत अधिकारी जी. वी. एस. पवन दता और मुख्य अधिकारी गोविंद जाधव की प्रत्यक्ष उपस्थिति में जेसीबी की सहायता से इमारत को ढहाने की कार्रवाई की गई। स्ट्रक्चरल ऑडिट में इस इमारत की पहले ही 'खतरनाक' घोषित कर दिया गया था, किसी भी प्रकार के विरोध या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस निरीक्षक महेश कुलकर्णी के मार्गदर्शन में मौके पर कहा पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया था।

पुनर्वास पर उठे सवाल

एक तरफ जहां विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वर्षों से यहां व्यापार कर रहे दुकानदारों का भविष्य धुंधला गया है- इमारत गिरने के रसथ ही वहां स्थित दर्जनों दुकानों (गाली) का अस्तित्व खत्म हो गया है, जिससे व्यापारियों की आखों में आसू है।

हालाकि प्रशासन ने नई परियोजना में गाले देने का आश्वासन दिया है। लेकिन काम पूरा होने तक दुकानदार अपना गुजारा कैसे करेंगे, यह सवाल अनुत्तरित है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि विकास अनिवार्य है। लेकिन प्रभावितों का उचित और त्वरित पुनर्धारा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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