प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )  
नासिक

सिंहस्थ तैयारी तेज: कुशावर्त कुंड में लगेगी आधुनिक जलशुद्धिकरण प्रणाली, कुंड होगा 3 घंटे में स्वच्छ

Trimbakeshwar Kumbh: आगामी सिंहस्थ कुंभ के मद्देनजर त्र्यंबकेश्वर में बुनियादी ढांचे का नवीनीकरण तेज हुआ है। कुशावर्त कुंड में CSR से आधुनिक जलशुद्धिकरण प्रणाली लगाई जाएगी।

अंकिता पटेल

Water Purification Plant: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर त्र्यंबकेश्वर में बुनियादी ढांचे के पुनरुद्धार का कार्य तेज हो गया है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने तीर्थस्थलों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार से 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निधि की मांग की है।

इस योजना के तहत कुशावर्त कुंड (भाग दो और तीन) सहित शहर के अन्य ऐतिहासिक मंदिरों और तीर्थों की मरम्मत की जाएगी। विशेष रूप से कुशावर्त कुंड, जहां शाही स्नान संपन्न होता है, वहां वर्तमान में कार्य प्रगति पर है।

दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान पिछले कुंभ मेले के दौरान कुशावर्त कुंड के लिए स्थापित जल शुद्धिकरण संयंत्र बिजली बिल बकाया होने के कारण बंद हो गया था, जिससे श्रद्धालुओं को अशुद्ध जल में स्नान करना पड़ा था।

इस समस्या को देखते हुए कुंभ मेला प्राधिकरण ने इस बार स्थायी विकल्प खोजा है। अब एक ऐसी आधुनिक प्रणाली स्थापित की जाएगी, जो मात्र तीन घंटे के भीतर संपूर्ण कुंड के जल को स्वच्छ कर देगी।

CSR निधि से होगा रखरखाव इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुद्धिकरण संयंत्र का निर्माण एक निजी कंपनी के 'सीएसआर' (CSR) फंड से किया जाएगा। संबंधित कंपनी अगले दो कुंभ मेलों, अर्थात आगामी 25 वर्षों तक इस संयंत्र के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी उठाएगी।

कुंभ मेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने इस कार्य को तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा प्रस्तावित कार्य त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त, बल्लालेश्वर और त्रिगुणेश्वर जैसे स्थल संरक्षित श्रेणी में आते हैं।

पुरातत्व विभाग के अनुसार, मुख्य मंदिर के पीछे स्थित पुराने कुशावर्त कुंड, चोखोबा मंदिर, गंगासागर तालाब, बिल्वतीर्थ, इंद्रतीर्थ, मुकुंद तीर्थ, गौतमेश्वर तालाब, गौतमेश्वर मंदिर और प्रयागतीर्थ के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाएं कुंभ मेला प्राधिकरण और राज्य सरकार द्वारा शहर की क्षमता बढ़ाने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

यातायात एवं परिवहन

इनर रिंग रिंग रोड का विस्तारः मुख्य शहर में भीड़ कम करने के के लिए बाहरी और भीतरी रिंग रोड का सुदृढीकरण और चौड़ीकरण।

नया तपोवन डिपो बाहरी जिलों से आने वाली बसों के लिए तपोवन क्षेत्र में एक अत्याधुनिक बस टर्मिनल का निर्माण।

अस्थायी पार्किंग जोन शहर के बाहरी हिस्सों में लगभग 500

एकड़ भूमि पर अस्थायी पार्किंग स्थलों का विकास, जहां से 'शटल सेवा' उपलब्ध होगी।

घाटों का विस्तार एवं सौंदर्गीकरण

नए घाटों का निर्माणः गोदावरी नदी के तट पर 'नीलपंख' से 'दसक' तक नए घाट बनाना ताकि शाही स्नान के समय भीड़ को विभाजित किया जा सके।

त्र्यंबकेश्वर में कुशरावत तीर्थकुंड

के दूसरे और तीसरे चरण के कार्यों तथा अन्य मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए सिंहस्थ कुंभमेला निधि से 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि अपेक्षित है।

सहायक निदेशक, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग- अमोल गोटे 

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता

अस्थायी अस्पतालः मेला क्षेत्र में 500 बिस्तरों वाले अस्थायी 'फील्ड हॉस्पिटल' और 50 से अधिक प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की स्थापना।

मोबाइल टॉयलेट्स: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 20,000 से अधिक पोर्टेबल शौचालयों और स्नानघरों की व्यवस्था।

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