Rajabhau Waje 150 Crore Offer Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 सांसदों को तोड़कर जहां एकनाथ शिंदे गुट ने बड़ा सियासी खेल कर दिया है, वहीं इस महा-संकट के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने उद्धव खेमे के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। नासिक लोकसभा क्षेत्र से नवनिर्वाचित सांसद राजाभाऊ वाजे ने पाला बदलने के लिए मिले करोड़ों रुपये के प्रलोभन और दबाव को सीधे तौर पर ठुकरा दिया है।
वाजे ने विपरीत परिस्थितियों में भी 'मातोश्री' और उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी अटूट वफादारी चुनी, जिसके बाद दिल्ली से नासिक लौटने पर शिवसैनिकों ने उनका किसी महानायक की तरह ऐतिहासिक स्वागत किया। इस दलबदल के बाद अब उद्धव ठाकरे के पास लोकसभा में केवल 3 वफादार सांसद (अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे) ही बचे हैं।
राजाभाऊ वाजे ने यह वफादारी किस कीमत पर निभाई है, इसका सनसनीखेज खुलासा खुद उनके पिता प्रकाश वाजे ने मीडिया के सामने किया है। प्रकाश वाजे ने बताया कि पिछले तीन-चार महीनों से उनके बेटे को तोड़ने के लिए 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत जाल बिछाया जा रहा था। उन्होंने दावा किया, "बीती 14 अप्रैल को शिंदे गुट की एक विशेष समिति ने नासिक स्थित हमारे आवास का दौरा किया था। इस समिति ने राजाभाऊ को पाला बदलने के बदले उनके निर्वाचन क्षेत्र के लिए 100 करोड़ रुपये के विशेष विकास फंड और व्यक्तिगत रूप से 50 करोड़ रुपये नकद देने का सीधा प्रस्ताव दिया था।" हालांकि, राजाभाऊ ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस प्रलोभन को लात मार दी और साफ कह दिया कि वे मरते दम तक उद्धव ठाकरे के साथ रहेंगे।
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संसदीय दल की बैठक में शामिल होने के बाद जब राजाभाऊ वाजे आज नासिक रेलवे स्टेशन पहुंचे, तो वहां का नजारा भावुक और अभूतपूर्व था। अपने वफादार सांसद का स्वागत करने के लिए हजारों की संख्या में पार्टी पदाधिकारी और आम शिवसैनिक स्टेशन पर इकट्ठा हो गए थे। जैसे ही वाजे ट्रेन से नीचे उतरे, पूरा परिसर "राजाभाऊ वाजे तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं" के नारों से गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने उन पर फूलों की पंखुड़ियों की बारिश की, ढोल-ताशों की गूंज के साथ आरती उतारी और उन्हें कंधों पर उठा लिया। बागी सांसदों की दगाबाजी से दुखी कार्यकर्ताओं के लिए वाजे की यह वफादारी किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं थी।
नासिक पहुंचने के बाद भावुक शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए सांसद राजाभाऊ वाजे ने कहा, "मैं नासिक की जनता के आशीर्वाद और अदना से लेकर आला कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत से चुनकर संसद पहुंचा हूं। मैं उस प्रखर विचारधारा और विश्वास के प्रति पूरी तरह ईमानदार हूं, जिसके नाम पर जनता ने मुझे वोट दिया है। प्रलोभन बहुत बड़े थे, लेकिन स्वाभिमान और निष्ठा से बढ़कर कुछ नहीं होता। मुझे लगता है कि मैंने जो निर्णय लिया है, वही सही है। शिवसैनिकों के साथ मेरा जो खून का रिश्ता था, इस संकट ने उसे और ज्यादा गहरा और अटूट बना दिया है।"