बुलडोजर एक्शन (सौजन्य-IANS कंसेप्ट फोटो) 
नासिक

'PM आवास' पर NMARDC का 'बुलडोजर', त्र्यंबकेश्वर रोड के घरों को तोड़ने का आदेश, कोर्ट की रोक बेअसर

Nashik NMARDC Action: नाशिक-त्र्यंबकेश्वर रोड पर NMARDC की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से नागरिकों में आक्रोश भड़का। हाईकोर्ट की रोक के बावजूद घरों को तोड़ने का नोटिस जारी किया गया।

प्रिया जैस

Nashik News: नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सड़क पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर 'नाशिक महानगर विकास प्राधिकरण' (NMARDC) के खिलाफ स्थानीय नागरिकों में तीव्र आक्रोश है। दरअसल, इस कार्रवाई पर उच्च न्यायालय ने व्यक्तिगत स्तर पर स्थगन (रोक) दे रखा है, बावजूद इसके NMARDC ने कई घरों को गिराने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं।

इन नोटिसों के अनुसार, यह विध्वंस कार्रवाई दिवाली की समाप्ति के तुरंत बाद शुरू होगी, जिससे त्योहार के समय ही नागरिकों के सामने अपना घर छोड़ने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पेगलवाड़ी से पिंपलगांव बहुला क्षेत्र के निवासियों को NMARDC ने नोटिस जारी किए हैं। इस कार्रवाई की जद में सड़क किनारे बने घर और पोल्ट्री शेड भी आ रहे हैं। नागरिकों में गुस्सा इसलिए भी अधिक है क्योंकि दिवाली जैसे महापर्व के दौरान उन्हें अपना घर खाली करने की चेतावनी दी जा रही है, जिससे इस क्षेत्र में दिवाली मनाने की वर्षों पुरानी परंपरा भी खंडित हो गई है।

चेतावनी से भड़के नागरिक

सरकारी योजना पर सवालः इस कार्रवाई की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें उन घरों को भी निशाना बनाया जा रहा है जो खुद सरकारी योजना के तहत बने थे। बेलगांव दंगा, सहाबा महल क्षेत्र के निवासी वामन गुंबाडे ने अपना घर साल 2020 में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत बनवाया था।

दिवाली के दौरान ही बेघर होने का संकट बढ़ा

पांच साल तक शांति से इसी घर में रहने के बाद, अब इसी पक्के घर को गिराने के लिए NMARDC ने नोटिस थमा दिया है। NMARDC के अधिकारी दो बार घर आकर घर खाली करने की कड़ी चेतावनी दे चुके हैं। यह स्थिति गुंबाडे परिवार पर दिवाली के दौरान ही बेघर होने का संकट ले आई है। NMARDC की इस बड़े पैमाने की कार्रवाई पर स्थानीय लोग तकनीकी सवाल भी उठा रहे हैं।

50 मीटर जगह खाली कराने की क्या है जरूरत ?

नाशिक से त्र्यंबकेश्वर तक की सड़क वर्तमान में नौ मीटर चौड़ी है, जो साइड पट्टी सहित कुल 12 मीटर चौड़ी है। NMARDC इस सड़क के केंद्र से एक तरफ 50 मीटर तक अतिक्रमण हटा रहा है। सड़क की चौड़ाई भविष्य में दोनों तरफ मिलाकर अधिकतम 30 मीटर तक होगी, तो स्थानीय निवासियों का सीधा सवाल है कि बाकी 50 मीटर जगह किसलिए खाली करवाई जा रही है?

NMARDC की इस कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की गई थीं और उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर स्थगन (रोक) भी मिला था। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होनी है, जहाँ NMARDC न्यायालय के सामने अपना पक्ष रखेगा। यदि उस सुनवाई में स्थगन हटा लिया जाता है, तो त्र्यंबकेश्वर रोड पर बड़े पैमाने पर विध्वंस कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

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