Trimbakeshwar Simhastha Kumbh Tapovan: नासिक त्रंबकेश्वर कुंभ सिंहस्थ को लेकर शासन प्रशासन सरकार के साथ-साथ अखाडो ने भी कुंभ को दिव्य -भव्य अलौकिक बनाने के लिए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
वैष्णो संप्रदाय के तीनो दिगंबर निर्माणी और निर्मोही के राष्ट्रीय प्रवक्ता और नासिक कुंभ के नियोजन प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे महंत भक्त चरण दास महाराज जी ने नवभारत से विशेष बातचीत करने के दौरान बताया है कि वैष्णो संप्रदाय के तीनों अखाड़े के लिए नासिक के तपोवन में 1200 एकड़ के अंतर्गत एक विशाल साधु ग्राम बसाया जा रहा है।
जिसके लिए मेल विकास प्राधिकरण और महानगरपालिका ने भूमिका अधिग्रहण कर लिया है। भक्ति चरण दास महाराज जी का कहना था कि नासिक त्रंबकेश्वर कुंभ के सकुशल संपन्न और दिव्य भव्य अलौकिक बनाने के लिए पहली बार मेला विकास प्राधिकरण का यह मेला प्राधिकरण कुंभ को भव्य बनाने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
महंत भक्ति चरण दास महाराज जी ने बताया कि नासिक शहर में सदियों से परंपरा चली आ रही है कि वैष्णो संप्रदाय के तीनों अखाड़े दिगंबर निर्माणी निर्मोही के चारों संप्रदाय और 84 पंथ के जगद्गुरु रामानंदाचार्य, द्वाराचार्य, वल्लभाचार्य, निंबार्कचार्य के साथ लगभग 1000 खालसे जिनके छावनियों की संख्या मिला दी जाए तो लगभग 1500 के आसपास की होती है।
जिसमें लगभग एक लाख से ज्यादा बैरागी और त्यागी संत महंतो के लिए तपोवन में 1200 एकड़ में साधु ग्राम बनाया जा रहा है जहां पर बिजली पानी शौचालय की व्यवस्था सरकार के द्वारा की जाती है उसके बाद जगद्गुरु महामंडलेश्वर श्री महंत महंत अपनी सुविधा अनुसार अपनी अपनी छावनियों को दिव्य और भव्य स्वरूप देते हैं।
महंत भक्ति चरण दास महाराज जी का मानना है कि वैष्णो संप्रदाय के सभी संत महंत के एक जगह होने के कारण तपोवन साधु ग्राम की एक ऐसी अलौकिक छटा नजर आएगी जिसे नासिक वासी जल्दी नहीं भूल पाएंगे।
महंत भक्ति चरण दास जी महाराज का कहना है कि वैष्णो परंपरा के संत विष्णु राम हनुमान और कृष्ण भक्ति में लीन रहते हैं और यही उनके आराध्य देव भी हैं और इस तपोवन में तो कौन-कौन में भगवान राम और हनुमान विराजमान थे जिसके कारण देश भर के वैष्णो संप्रदाय के संतों में नासिक सिंहस्थ कुंभ और तपोवन में कुंभ के दौरान साधना आराधना पूजा पाठ का एक विशेष महत्व है और यही कारण है कि वैष्णो संप्रदाय के संत नासिक के तपोवन को अपने लिए किसी तीर्थ से कम नहीं मानते।