नासिक-त्र्यंबकेश्वर में बंदरों के काटने की 400 से अधिक घटनाएं सामने आने का दावा।
वन विभाग की टीम ने 30 से 35 बंदरों को पकड़ा।
पकड़े गए बंदरों को आठ दिनों के भीतर प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी।
आवारा मवेशियों को पकड़कर नाशिक के पांजरापोल भेजने की योजना।
कुंभमेले से पहले आवारा कुत्तों पर भी विशेष अभियान चलाने की मांग।
Nashik Monkey Attack President Droupadi Murmu Visit: त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभमेले के ध्वजारोहण समारोह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 31 अक्टूबर को प्रस्तावित दौरे से पहले बंदरों को पकड़ने तथा आवारा मवेशियों को हटाने की कार्रवाई तेज की गई है। वन विभाग के अनुसार, बंदरों के काटने की 400 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, नागरिक आवारा कुत्तों पर भी नियंत्रण की मांग कर रहे हैं।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर, सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह की तैयारियों के बीच त्र्यंबकेश्वर में स्वच्छता और सुरक्षा अभियान तेज कर दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 31 अक्टूबर को प्रस्तावित दौरे से पहले वन विभाग बंदरों को पकड़ने और नगरपालिका आवारा मवेशियों को हटाने की कार्रवाई कर रही है। हालांकि, शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नागरिकों की चिंता अब भी बनी हुई है।
वन विभाग के अनुसार, ब्रह्मगिरी पर्वत क्षेत्र से शहर में आने वाले बंदरों के हमलों से नागरिक परेशान हैं। पिछले कुछ महीनों में बंदरों के काटने की 400 से अधिक घटनाएं सामने आने की जानकारी दी गई है। क्षेत्र में करीब 80 बंदरों की मौजूदगी का अनुमान है।
विभाग की टीम ने अब तक 30 से 35 बंदरों को पकड़ लिया है। अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए बंदरों को अगले आठ दिनों में उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
वन विभाग ने स्पष्ट किया कि बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई और राष्ट्रपति का प्रस्तावित दौरा एक ही समय पर होना संयोग है। नगरपालिका ने बंदरों की समस्या को लेकर पहले ही प्रस्ताव भेजा था। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति के दौरे के बाद भी जरूरत के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
शहर में घूमने वाले आवारा मवेशियों को पकड़ने के लिए नगरपालिका ने टेंडर जारी किया है। इन्हें नासिक स्थित पांजरापोल भेजने का निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ कुंभमेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने में जुटा है।
बंदरों और मवेशियों के साथ शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या भी नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुत्तों के काटने की घटनाओं के बाद रेबीज का टीका लगवाने के लिए सरकारी अस्पताल जाना पड़ता है, जो शहर से करीब सात किलोमीटर दूर है। ऐसे में घायलों को ऑटो रिक्शा से अस्पताल पहुंचना पड़ता है और अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
कुंभ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए नागरिकों ने आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए भी विशेष अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि बंदरों और मवेशियों के साथ कुत्तों से सुरक्षा का मुद्दा भी प्राथमिकता से हल किया जाना चाहिए।